कोरोना काल में लंबे समय तक स्कूल बंद रहे तो मजबूरी में बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ी। घरों में शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा था। बस किसी तरह कोर्स पूरा किया जा रहा था। इस दौरान सबसे अधिक दिक्कत विज्ञान वर्ग के छात्र-छात्राओं को हुई। कारण कि वे प्रायोगिक ज्ञान नहीं ले पा रहे थे। स्कूल खुलने पर ऐसे छात्र-छात्राएं राहत महसूस कर रहे हैं और प्रयोगशाला में प्रयोग करके शिक्षा की नींव मजबूत कर रहे हैं।
- ऑनलाइन क्लास से किताबों से पढ़ने की आदत बिल्कुल छूट गई थी। मोबाइल से पढ़ाई करने में ध्यान फोकस नहीं हो पाता था। ऐसे में पढ़ाई का नुकसान काफी हुआ। मगर अब ऑफलाइन क्लास शुरू हो गई हैं तो हम राहत महसूस कर रहे हैं।
- नेहा शर्मा, 12 वीं छात्रा
- ऑनलाइन पढ़ाई में कभी नेटवर्क की कमीं तो कभी मोबाइल का डिस्चार्ज होना। तमाम समस्याएं थी। आंखों में भी दर्द होने लगता है। अब कक्षा में बैठकर पढ़ाई का जो माहौल मिलता है, वो कहीं और नहीं।
ऑनलाइन हमने पढ़ाया, मगर बच्चों के समझ में ज्यादा नहीं आया। इसका कारण है कि हमें रिवीजन प्रयोग कराकर कराना पड़ रहा है। बड़े विद्यार्थियों में कम मेहनत करनी पड़ रही है, छोटी क्लासों के विद्यार्थियों में शिक्षा का स्तर काफी कम हो गया है। हम बच्चों की काउंसलिंग कर उनको पढ़ा रहे हैं। कक्षा 11 और 12वीं क्लास के विद्यार्थियों को प्रयोगशाला में प्रयोग कराए जा रहे हैं।