कोरोना संक्रमण कम होने के बाद विद्यालय खुले तो बच्चों की मनोदशा को समझकर शिक्षा को पूरा कराना चुनौती साबित हो रहा था, लेकिन बिना दबाव बनाए बच्चों की शिक्षा को पूरा करने पर जोर दिया गया। कोरोना काल में लगाई गईं बंदिशों का पालन करते हुए घरों में बच्चों को पढ़ाया।
कोरोना काल में पिछड़ी पढ़ाई की अभी तक भरपाई नहीं हो पाई है। शिक्षकों का सहयोग मिलने से पढ़ाई सामान्य रूप से करने में मार्गदर्शन मिला।
प्रिया राजौरिया, छात्रा 10वीं
कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई की थी लेकिन बहुत ज्यादा समझ में नहीं आता था। जबसे विद्यालय खुले, पढ़ाई ठीक से हो पाई। शिक्षकों का सहयोग रहा।
रितिक शाक्य, छात्र 10वीं
कोरोना काल के दो वर्ष बच्चों की पढ़ाई पिछड़ने से कई ट्यूशन लगानी पड़ीं। शिक्षकों ने भी खूब पढ़ाया, अब आकर पढ़ाई ठीक हो पाई है।
ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों की समझ में नहीं आती थी। बच्चे मोबाइल लेकर बैठ जाते थे, लेकिन बहुत लाभ नहीं मिल रहा था। विद्यालय खुलने पर पढ़ाई बेहतर हुई।