कासगंज। पुलिस अभिरक्षा में कोतवाली के टॉयलेट में लगभग साढ़े पांच माह पहले हुई अल्ताफ की मौत के मामले हाईकोर्ट के आदेश पर विधिविज्ञान की टीम ने परिजन की मौजूदगी में घटना का रीक्रिएशन किया। अल्ताफ के वजन के पुतले को टायलेट में फंदे के फंदे पर लटकाया गया। इस रीक्रिएशन से अल्ताफ के परिजन असंतुष्ट नजर आए।
अहरोली निवासी अल्ताफ पुत्र चांद मिया की मौत आठ नवंबर 2021 को पुलिस अभिरक्षा में हो गई थी। उसका शव नौ नवंबर को कोतवाली के टॉयलेट में ढाई फुट ऊंची पानी की टंकी से जेकेट के हुड से बंधा मिला था। पुलिस ने युवक की मौत का कारण आत्महत्या बताया, लेकिन परिजन के गले पुलिस की यह थ्योरी नहीं उतरी। यह मामला काफी तूल पकड़ गया। हाईकोर्ट के निर्देश पर 15 फरवरी को उसका शव बाहर निकालकर 16 फरवरी को एम्स में फिर से पोस्टमार्टम कराया। इसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में रीक्रिएशन के आदेश दिए। पहले यह रीक्रिएशन मंगलवार को होना था, सारी तैयारी होने के बाद अंतिम क्षणों में कार्यक्रम को टाल दिया गया। इसके बाद बुधवार को फिर से परिजनों को बुलाकर विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने अल्ताफ के वजन के बराबर पुतले को कोतवाली के टॉयलेट में ढाई फीट ऊँचे नल की टोंटी पर जैकेट के हुड की रस्सी से फंदा लगाकर लटकाया गया।, लेकिन पुतला पूरी तरह से जमीन पर नहीं लेट सका। अल्ताफ के पिता का कहना था कि पुतले का वजन लगभग 57 किलो का था। जब पुतले को उसी टॉयलेट के ढाई फ़ीट ऊंचे नल से लटकाया गया तो पुतला पूरी तरह नहीं लटका। पुतला पूरी तरह जमीन पर नहीं लेटा और ना ही वहां लेटने की जगह थी।
अल्ताफ की मौत के मामले में प्रथम चरण का रीक्रिशन हो गया है। अभी यह क्रिया फिर से कराई जाएगी। रीक्रिएशन की वीडियोग्राफी भी कराई गई है। अभी मामले की जांच चल रही है। - सीओ आरके तिवारी, जांच अधिकारी