अखिल भारतीय महापौर परिषद के 50वें राष्ट्रीय अधिवेशन में शनिवार को देशभर के सभी नगर निगमों में एकरूपता लाने के लिए एक नियमावली बनाए जाने और महापौरों के अधिकारों में बढ़ोतरी करने पर बल दिया गया।
विज्ञापन
यूपी के दोनों उप मुख्यमंत्रियों ने भी महापौरों की शक्तियों में इजाफे को शहरी निकायों के विकास के लिए जरूरी बताया। उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ऐसे मेयरों को सम्मानित किया, जो कि सांसद और विधायक बन चुके हैं।
अधिवेशन में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नगर निकाय जन्म से लेकर मृत्यु तक का हर व्यक्ति का लेखा-जोखा रखते हैं। शहर का प्रथम व्यक्ति होने के नाते वो बुद्धिजीवियों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
विज्ञापन
'स्वच्छता की मुहिम को धार दें मेयर'
उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा को सम्मानित करते महापौर
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी बनाने के लिए मेयरों पर बड़ी जिम्मेदारी है। सरकार उनके साथ खड़ी है। महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर स्वच्छता की मुहिम को धार देनी है। महापौरों ने उत्तराखंड की राज्यपाल के सामने समस्याओं को रखा।
उनका कहना था कि कई जगह मेयरों का कार्यकाल एक साल है तो कहीं ढाई साल। अधिकारों की बात करें तो केरल में मेयर को नगरायुक्त को निलंबित करने का अधिकार है। समस्याएं एक जैसी हैं, मगर अधिकार कम हैं।
जब देश में कर एक समान हो सकता है तो नगर निकाय के नियम क्यों नहीं हो सकते हैं। ऐसे में शहरी विकास को गति देने के लिए मेयरों को शक्ति संपन्न बनाना होगा। राज्यपाल और उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों का समर्थन किया।
कांटों का ताज है महापौर का पद : बेबीरानी मौर्या
अधिवेशन में संबोधित करतीं उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल बेबीरानी मौर्य ने कहा कि मैं जानती हूं कि महापौर का पद काटों का ताज है। सबसे अधिक चुनौती महिला महापौरों के लिए है। वह आगरा की मेयर रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महापौर राजनीति के साथ सामाजिक कार्य करते रहें। सरकार की जितनी योजनाएं चल रही हैं, अगर महापौर उन्हीं का लाभ लोगों तक पहुंचाते रहें तो भी सहूलियत होगी। महापौर शहर की हर छोटी बड़ी घटना का संज्ञान लेते रहे।
इन मुद्दों पर हुई चर्चा
-नगरीय सेवाओं को बेहतर बनाने
-स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान को मजबूत बनाने व जनसहभागिता पर चिंतन
-गिरते भूजल स्तर व पेयजल समस्या के निदान के उपायों को लेकर चर्चा
-जिन प्रांतों में 74वां संशोधन लागू नहीं हुआ है, उस पर विचार विमर्श
-महापौरों को अधिकारों की वृद्घि करने
-पूरे देश के एक जैसी निकाय व्यवस्था बनाने पर चर्चा
-स्मार्ट सिटी के प्रावधानों पर चर्चा।
राष्ट्रीय अधिवेशन में आगरा के सांसद एसपी सिंह बघेल, सांसद फतेहपुर सीकरी राजकुमार चाहर, इटावा सांसद रामशंकर कठेरिया, भारतीय महापौर परिषद के अध्यक्ष तथा ग्वालियर के सांसद विवेक शेजवलकर, सांसद रायपुर सुनील सोनी, जम्मू कश्मीर के पूर्व उप मुख्यमंत्री कविन्द्र गुप्ता, इंदौर की विधायक एवं महापौर मालिनी गौड़, ब्रजक्षेत्र के अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, भोपाल के पूर्व मेयर तथा महामंत्री संगठन उमाशंकर गुप्ता आदि मौजूद रहे।