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लोकसभा चुनाव 2024: अखिलेश यादव ने चला ऐसा दांव, भाजपा में बढ़ी बैचेनी; गेम चेंजर साबित हो सकते हैं शाक्य वोट

Thu, 04 Apr 2024 05:16 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव ने हर सीट से बेहद ही सोच समझकर प्रत्याशियों का चयन किया है। इस बार एटा लोकसभा से भी ऐसे प्रत्याशी पर दांव लगाया है कि दो बार जीतने वाली भाजपा के खेमे में भी बैचेनी छाई हुई है। 
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अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूं तो एटा लोकसभा सीट पर मतदाताओं के बीच मुख्य मुकाबला लोधी और यादवों के बीच रहता है। यही दोनों जाति वर्ग सर्वाधिक हैं। जो अपनी एकजुटता के साथ जीत-हार का फैसला करते हैं। लेकिन इस बार समीकरण बदले हुए हैं। परंपरागत वोट तो दोनों दलों का अपनी-अपनी जगह है, जबकि शाक्य मतदाताओं में बिखराव के आसार बन गए हैं। भाजपा के बेस वोटर कहे जाने वाले ये मतदाता सपा से शाक्य आने के बाद असमंजस में है। ऐसे में शाक्य मतदाता जिस ओर एकजुटता के साथ झुकते हैं तो गेम चेंबर साबित हो सकते हैं।
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लोकसभा सीट पर लोधी, यादवों के अलावा शाक्य मतदाताओं की भी संख्या भारी-भरकम है। पूर्व के चुनावों में तमाम शाक्य प्रत्याशी किस्मत आजमा चुके हैं। इसी वर्ग से महादीपक सिंह शाक्य एटा लोकसभा सीट पर पांच बार और कासगंज लोकसभा सीट पर एक बार सांसद रहे थे। दो बार यादव और तीन बार लोध वर्ग से सांसद चुने गए हैं। सामान्य रूप से यहां भाजपा को शाक्य मतदाताओं का साथ मिलता रहा है। जिसके चलते जातीय समीकरण के लिहाज से पार्टी का पलड़ा भारी हो जाता है। इसी समीकरण को कमजोर कर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए सपा ने शाक्य प्रत्याशी को यहां भेजा है।

 

सपा के देवेश शाक्य लगातार सजातीयों में बैठकें कर उनका रुख सपा की ओर मोड़ने के प्रयास में जुटे हैं। तो भाजपा इन मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखने के लिए ताकत लगा रही है। शाक्य समाज के पार्टी नेताओं को चेहरा बनाकर बैठकें की जा रही हैं। यूं तो मोदी के व्यक्तित्व और अयोध्या मंदिर लहर में लड़े जा रहे चुनाव में भाजपा बेहद मजबूत मानी जा रही है। लेकिन पीडीए का फाॅर्मूला लेकर आई सपा के साथ यहां शाक्य फैक्टर भी जुड़ गया है। साथ ही गठबंधन में कांग्रेस का भी साथ है। ऐसे में भाजपा का जीतना आसान नहीं होगा।

 
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बसपा पर भी निगाहें
इस सीट पर अभी तक बसपा ने अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। यदि बसपा भी शाक्य प्रत्याशी को लेकर आती है तो मुकाबला और ज्यादा रोचक हो जाएगा। शाक्य वोट के पूरी तरह बिखरने की शंका बन जाएगी। ऐसे में भाजपा के साथ ही सपा को भी नुकसान होगा।
 
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