मीडिया से मुखातिब होते सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
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किसी सभ्य समाज में हिंसा को प्रोत्साहित नहीं किया जा सकता। तलवार, डंडे और हथियार लहराकर सम्मेलन की आड़ में भय का माहौल बनाने की कोशिश की गई। अराजकता से नियम व शर्तों का मखौल उड़ाया गया। यह वही लोग हैं जो नहीं चाहते कि जाति गणना हो। सभी को समान दर्जा मिले। ये कहना है सपा सांसद रामजी लाल सुमन का।
रविवार को आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने बताया कि विरोध कानून के तहत होना चाहिए। जिस तरह से विरोध किया गया, वह हिंसा है। विरोध करने वाले भाजपा की मानसिकता के लोग हैं। यह वैचारिक संघर्ष की लड़ाई है। एक तरफ सामंती लोग हैं जो अपनी मनोवृत्ति से समझौता नहीं करना चाहते। दूसरी तरफ वो लोग हैं सामाजिक न्याय के पक्षधर हैं। जिनका हक मारा गया। ये वही लोग हैं जो अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री पद से हटते ही उनके घर की गंगाजल से सफाई करते हैं। राजस्थान में दलित नेता मंदिर में चले गए तो मंदिर की सफाई की।
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