आगरा की हवा में घुले जहर ने लोगों का दम फुला दिया। लोगों को आंखों में जलन की शिकायत भी रही। गुरुवार को आगरा देश का 10वां प्रदूषित शहर रहा, वहीं प्रदेश में 7वां प्रदूषित शहर रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी की गई सूची में आगरा का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 398 दर्ज किया गया।
बुधवार के मुकाबले यह मामूली कम है, लेकिन इससे लोगों को राहत नहीं मिली, बल्कि उनकी मुसीबत सूक्ष्म कण पीएम 2.5 नौगुना होने से और बढ़ गई। दरअसल, पीएम कणों की मात्रा 500 के पार पहुंच गई है, जिस वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी का अनुभव हुआ और गले में खराश के साथ आंखों में जलन बढ़ गई।
गुरुवार को धूल कणों की मात्रा सामान्य से 9 गुना पहुंच गई। खतरनाक कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा सामान्य से 7 गुना रही तो नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा 4 गुना दर्ज की गई। धूल कणों का उच्चतम स्तर 500 पर पहुंच गया, जो सबसे गंभीर श्रेणी में है। अस्थमा और सांस रोगियों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक है।
प्रदूषण बढ़ा, लेकिन निर्माण कार्य जारी
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी किए गए एयर एक्शन प्लान में पीएम कणों की मात्रा 500 तक पहुंचने के बाद धूल उड़ाने वाले निर्माण कार्यों को बंद करने का प्रावधान है, लेकिन शहर में सरकारी विभागों द्वारा सीवर लाइन की खोदाई, पुल निर्माण, नाले के लिए खोदाई समेत सड़कों की खोदाई और निर्माण कार्य जारी है। एयर एक्शन प्लान में नेशनल हाइवे, नगर निगम से जुड़े 15 बिंदु हैं, लेकिन दोनों ने एक का भी पालन नहीं किया।
नेशनल हाइवे अथारिटी द्वारा आईएसबीटी, शाहदरा और सिकंदरा सब्जी मंडी के सामने पुल निर्माण के काम में धूल उड़ाती रही, वहीं सीवर लाइन के कारण शहर की 70 किमी से ज्यादा सड़कें खोदी गई हैं। वहां दिनभर धूल उड़ती रही। जगदीशपुरा किशोर पुरा रोड, पश्चिमपुरी, दहतोरा मोड़, आवास विकास कॉलोनी, सेंट्रल पार्क रोड समेत शहर में निर्माण कार्यों के दौरान धूल उड़ने से हालात और बिगड़ गए।