डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि के हाल अजब-गजब है। यहां छात्र भटकते नजर आते हैं और जिम्मेदार बेफिक्र। अंक तालिकाओं में गड़बड़ियां यहां की कार्यशैली का हिस्सा बन चुकी हैं। पिछले दो दिनों से डिग्री को लेकर परेशान छात्रों की भीड़ बढ़ी है। शुक्रवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया जिसमें एमएससी बायोटेक्नोलॉजी के छात्र गुलाम जिलानी पिछले चार साल से अपनी डिग्री का इंतजार कर रहे हैं।
आंबेडकर विवि में इन दिनों बीएड, एलएलबी की परीक्षा चल रही हैं तो इधर विवि से संबद्ध महाविद्यालयों और आवासीय संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इधर विवि के तमाम छात्रों को दूसरे विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेना है तो किसी को नौकरी के लिए आवेदन करना है।
ऐसे में ये छात्र-छात्राएं अंक तालिका, डिग्री के लिए रोज विवि के चक्कर लगाते नजर आते हैं। कृष्णा कॉलेज से एमएससी बायोटेक्नोलॉजी की परीक्षा साल 2011 में पास करने वाले गुलाम जिलानी ने साल 2013 में प्रोविजनल डिग्री बनवाई थी। साल 2020 19 अगस्त को गुलाम ने विवि में डिग्री के लिए आवेदन किया। लेकिन 4 साल बीतने के बाद भी उनके हाथ में डिग्री नहीं आ सकी है। इस दौरान छात्र ने विवि के सैकड़ों चक्कर काटे, दर्जनों पर पटल पर सहायक से मुलाकात की। इस दौरान हर सक्षम अधिकारी से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। हर बार उन्हें आश्वासन तो मिला लेकिन डिग्री नसीब न हो सकी। जबकि मेडिकल की एक छात्रा की डिग्री बीते दिनों विश्वविद्यालय ने सिर्फ 4 दिनों में बनाकर दे दी।
छात्र का आरोप है कि एमबीबीएस की एक छात्रा ने डिग्री के लिए 14 जुलाई को आवेदन किया और 18 जुलाई को प्रिंटेड डिग्री छात्रा को उपलब्ध करा दी गई। सुविधा शुल्क देने वालों का काम विवि कर्मचारी तुरंत कर देते हैं।
दिलवाएंगे डिग्री
परीक्षा नियंत्रक ओम प्रकाश ने बताया कि छात्र ने मुझसे मुलाकात नहीं की, प्रकरण संज्ञान में नहीं है। छात्र की डिग्री का पता करवाकर अति शीघ्र ही दिलवा देंगे।