डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय
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डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत स्नातक और परास्नातक स्तर की विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं 24 जनवरी से शुरू हुई हैं, अभी तक परीक्षा में एक भी नकलची नहीं पकड़ा है। मंडल के चारों जिलों (आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी) में उड़नदस्ते दौड़ लगा रहे हैं। परीक्षा ओएमआर शीट पर हो रही है, वैकल्पिक प्रश्न पूछे जा रहे हैं। नकल पर्चियां से नहीं बोलकर ही कराई जा रही हैं। 100 में से 60 प्रश्नों के ही उत्तर हैं।
सम सेमेस्टर की परीक्षा में विवरणात्मक प्रश्न पूछे गए थे। इसमें आगरा कॉलेज में ही अकेले 100 से ज्यादा परीक्षार्थियों को नकल की पर्चियों के साथ पकड़ा गया था। उड़नदस्तों ने कई केंद्रों के खिलाफ सामूहिक नकल कराने की रिपोर्ट दी थी। विषम सेमेस्टर की परीक्षा में दो-दो जिलों पर एक-एक समन्वयक उड़नदस्तों के संचालन के लिए बनाए गए हैं। उड़नदस्ते जा भी रहे हैं, नकल पकड़ में नहीं आ रही है। उड़नदस्ते में जाने के मामले में औटा के कुछ सदस्य शिक्षकों में व्हाट्सएप पर कहासुनी भी हुई।
विश्वविद्यालय की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से केंद्रों की निगरानी की जा रही है, इसमें भी नकल पकड़ में नहीं आ रही है। इसकी एक वजह यह है कि अधिकतर केंद्रों में वायस रिकार्डर लगे नहीं हैं, कंट्रोल रूम में कमरे दिख तो रहे हैं, परीक्षा के दौरान आवाज नहीं आ रही है। जिससे बोलकर कराई जाने वाली नकल को भी नहीं पकड़ा जा सकता।
पिछली परीक्षा में जिन्हें पकड़ा, उन पर भी कुछ नहीं किया
विश्वविद्यालय की गत सेमेस्टर परीक्षा में जिन कॉलेजों में सामूहिक नकल पकड़े जाने की संस्तुति की गई थी, उनके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया। नकल में पकड़े गए कॉलेजों को एक तरह से बचा लिया गया। परीक्षा केंद्र निर्धारण से पहले डिबार केंद्रों की सूची जारी की जानी चाहिए। परीक्षा नियंत्रक लगातार कहते रहे कि परीक्षा केंद्रों के साथ डिबार केंद्रों की सूची भी जारी की जाएगी। ऐसा किया नहीं किया गया।