डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में एक और बड़ा खेल सामने आया है। बीएचएमएस की परीक्षा में 60 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राएं फेल हो गए। कॉलेजों के कहने पर बिना परीक्षा समिति में प्रस्ताव रखे और छात्र-छात्राओं की ओर से चुनौती मूल्यांकन का आवेदन हुए बिना कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन करा दिया गया। अधिकतर फेल छात्र इसमें पास हो गए।
विश्वविद्यालय के नियमानुसार कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन सीधे किसी अधिकारी के आदेश पर नहीं हो सकता है। इसे परीक्षा समिति में पास कराना अनिवार्य है। दूसरे विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाई गई है कि यदि छात्र-छात्राएं मूल्यांकन से संतुष्ट नहीं है तो वह आरटीआई के तहत अपनी कॉपी देख सकते हैं और चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए फीस निर्धारित है और परीक्षा के बाद निर्धारित अवधि में चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। नियमानुसार ही पुनर्मूल्यांकन शिक्षकों के पैनल से कराया जाता है। बीएचएमएस की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन में दोनों ही व्यवस्थाओं पर अमल नहीं किया गया।
डीन की ओर से यह तर्क दिया गया था कि कॉपियों का मूल्यांकन प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षकों से कराया गया, जबकि उनकी ओर से भेजे गए पैनल में प्राइवेट शिक्षकों का नाम नहीं था। छात्र-छात्राओं का परिणाम संतोषजनक नहीं है। वहीं सूत्रों के अनुसार मूल्यांकन में महज दो प्राइवेट कॉलेज के शिक्षक थे। किसी स्थिति में परीक्षा समिति में रखे बिना पुनर्मूल्यांकन नहीं कराया जाना चाहिए था। 8 अगस्त 2022 को परीक्षा समिति की बैठक हुई, उसमें भी प्रकरण को रखा नहीं गया।