विश्व दिव्यांग दिवस पर आगरा पुलिस लाइन में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ। इस शिविर में पुलिसकर्मियों को विशेष सड़क सुरक्षा एवं सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण दिया गया।
नाक पर उंगली रखने का मतलब महिला के बारे में बात और मूंछ का मतलब युवक है। गर्दन काटने का इशारा देकर हथेली दिखाने का मतलब लाल बत्ती है। किसी मूक-बधिर को अपना नाम कैसे बताएं, ऐसे सभी संकेत बुधवार को पुलिस लाइंस में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने सीखे।
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विश्व दिव्यांग दिवस पर आगरा एसोसिएशन ऑफ डीफ के पदाधिकारियों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम में पुलिस ने मूक-बधिरों के सवालों के जवाब भी दिए। रिजर्व पुलिस लाइंस के शहीद प्रशांत मेमोरियल हॉल में विशेष सड़क सुरक्षा एवं सांकेतिक भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
डीसीपी ट्रैफिक सोनम कुमार के निर्देशन में आयोजित कार्यक्रम में एडीसीपी हिमांशु गौरव और एसीपी ताज सुरक्षा पीयूष कांत राय मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत सांकेतिक भाषा में यातायात नियमों की जानकारी देने से हुई। मूक-बधिर प्रतिभागियों को हेलमेट और सीट बेल्ट के अनिवार्य उपयोग, लेन अनुशासन, यातायात संकेतों की पहचान, दुर्घटना-निवारण के बारे में भी बताया गया। मूक-बधिर चालकों ने अपनी रोजाना की चुनौतियों, सड़क पर सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में बताया। पुलिसकर्मियों ने कार्यक्रम में आए मूक-बधिरों के वाहनों पर मूक-बधिर के चिह्न वाले स्टीकर लगाए, जिससे उनके वाहन सड़क पर आसानी से पहचाने जा सकें।