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नए साल में महंगा हुआ जूता: जीएसटी बढ़ाने से आगरा के उद्यमियों में आक्रोश, बढ़ोतरी वापस लेने की मांग

Sat, 01 Jan 2022 10:41 AM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आगरा के उद्यमियों ने कहा कि देश की 65 फीसदी आबादी को आगरा फुटवियर पहनाता है। जूते कोई लग्जरी नहीं है, बल्कि हर आदमी की जरूरत है। टैक्स बढ़ने से इसका सीधा असर लोगों पर पड़ेगा।
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जूते पर 12 फीसदी हुई जीएसटी
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विस्तार
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साल 2021 के आखिरी दिन कपड़े के व्यापारियों को जीएसटी काउंसिल ने राहत पहुंचाई, जबकि जूते के व्यापारियों और उत्पादकों की मुसीबतें और बढ़ा दीं। जीएसटी काउंसिल ने जूते और चप्पलों पर जीएसटी की दर एक जनवरी से पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी करने के लिए मंजूरी दे दी। ताजनगरी के व्यापारियों ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि आगरा देश की 65 फीसदी आबादी को फुटवियर पहनाता है।

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ताजनगरी में जूतों के उत्पादन और कारोबार से चार लाख लोग जुड़े हुए हैं, जिन पर शनिवार से प्रस्तावित बढ़ोतरी का असर पड़ेगा। एक हजार रुपये तक के जूते शुक्रवार तक 1050 रुपये के बिक रहे थे, लेकिन आज से यह 1120 रुपये में मिल पाएगा। जूता कारोबारियों ने शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल के फैसले का विरोध करने के साथ बढ़ोतरी पर आक्रोश जताया, वहीं कपड़ा व्यापारियों में खुशी है। 

जूते लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत हैं
जूता दस्तकार संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र सोनी ने कहा कि जूते लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत हैं। आम आदमी पर यह सीधे सीधे बोझ डालने वाली बात है। जीएसटी काउंसिल को कपड़े की तरह जूते पर जीएसटी पर बढ़ोतरी स्थगित रखनी चाहिए। जब बाजार पहले से ही अधमरा है, तब जीएसटी की बढ़ोतरी पूरे उद्योग को नुकसान पहुंचाएगी। 

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'बढ़ोतरी वापस ली जानी चाहिए'
फ्रेटरनिटी ऑफ आगरा फुटवियर मैन्यूफैक्चरर्स के अध्यक्ष कुलदीप सिंह ने कहा कि फुटवियर पर पांच से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी पूरे उद्योग के लिए अनुचित है। शहर के 4 लाख लोग इससे जुड़े हैं। देश के 65 फीसदी जूते की जरूरत पूरा करते हैं। चुनाव से पहले ही यह बढ़ोतरी वापस ली जानी चाहिए। जब तक जीएसटी कम नहीं होता, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। 

'फरवरी में इस पर हो जाएगा फैसला'
व्यापार संघ के संरक्षक दिनेश अग्रवाल ने कहा कि कपड़े पर जीएसटी की बढ़ोतरी वापस लेने का सरकार का अच्छा कदम है। इससे आम आदमी को राहत मिलेगी, लेकिन कपड़े की तरह जूते पर भी बढ़ोतरी स्थगित करने की जरूरत थी। यह होता तो और अच्छा फैसला रहता। उम्मीद है कि फरवरी में इस पर फैसला हो जाएगा। 

'जूते-चप्पलों पर भी टैक्स कम होना चाहिए'
 सीए इंस्टीट्यूट की सचिव सीए दीपिका मित्तल ने कहा कि टैक्सटाइल पर जीएसटी बढ़ोतरी को स्थगित करने का फैसला राहत भरा कदम है, लेकिन जूते-चप्पलों पर भी टैक्स कम होना चाहिए था। सरकार जीएसटी रिफंड के लिए आधार सत्यापन अनिवार्य करने के कदम भी नए साल में उठाने जा रही है। 

कपड़ा व्यापारियों का संघर्ष रंग लाया
आगरा व्यापार मंडल के अध्यक्ष टीएन अग्रवाल ने कहा कि कपड़ा व्यापारियों का संघर्ष रंग लाया। सूरत से लेकर कानपुर तक और दिल्ली के व्यापारियों के साथ मिलकर हमने सरकार पर दबाव बनाया, जिसका असर ये हुआ कि जीएसटी बढ़ोतरी स्थगित कर दी गई। जूते पर भी टैक्स कम किये जाने की जरूरत है।
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