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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: संकट के दौर में नहीं बना था ऑक्सीजन आपूर्ति का ब्योरा

Fri, 16 Jul 2021 11:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

20 अप्रैल से 7 मई तक आपूर्ति में वेंडर से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने मनमानी की। तीमारदार ऑक्सीजन के लिए भटकते रहे और प्लांटों से 15 से 20 हजार रुपये तक सिलिंडर बिक गए। 
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन संकट में मॉकड्रिल की गई। उन दिनों कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति का पक्का लेखा-जोखा नहीं बना था। 20 अप्रैल से 7 मई तक आपूर्ति में वेंडर से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों ने मनमानी की। तीमारदार ऑक्सीजन के लिए भटकते रहे और प्लांटों से 15 से 20 हजार रुपये तक सिलिंडर बिक गए।

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जिला प्रशासन ने श्री पारस अस्पताल में 25 व 26 अप्रैल को 48 घंटे में 305 सिलिंडर आपूर्ति का दावा किया है। जिनमें 25 अप्रैल को 149 सिलिंडर और 26 अप्रैल को 121 सिलिंडर भेजे गए। इनके अलावा 35 सिलिंडर रिजर्व थे। प्रशासन के मुताबिक आपूर्ति किए सिलिंडर भर्ती मरीजों के लिए पर्याप्त थे। परंतु पर्याप्त किस आधार पर माने गए यह अभी तक तय नहीं हो सका है। 

उस दिन श्री पारस अस्पताल में 96 मरीज भर्ती थे। आईसीयू में एक बार में चार सिलिंडर से ऑक्सीजन सप्लाई होती थी। ऐसे में 48 घंटे में आईसीयू में 190 सिलिंडर की खपत होती। आईसीयू के अलावा 74 मरीज ऐसे थे जिनके लिए 100 सिलिंडर ही उपलब्ध थे। जिनमें 30 से अधिक मरीज हाई फ्लो पर निर्भर थे। उस दौर में 20 अप्रैल से 7 मई तक ऑक्सीजन आपूर्ति पर्चियों के सहारे हो रही थी। 
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जिले में सिर्फ एक प्लांट चालू था। ऑक्सीजन के लिए शहर में हाहाकार मचा था। 25 अप्रैल की रात संकट इतना विकराल हो गया कि रातभर अधिकारी कवायद में जुटे रहे। 

810 सिलिंडर का हुआ था फर्जीवाड़ा
31 अप्रैल से 4 मई तक पांच दिनों में 810 सिलिंडर का फर्जीवाड़ा हो चुका है। जिन पांच अस्पतालों के नाम पर सिलिंडर की आपूर्ति की गई, उन अस्पतालों में सिलिंडर ही नहीं पहुंचे। एक व्यक्ति को प्रशासन ने चिह्नित भी किया था, पर कार्रवाई नहीं की गई।

प्रशासन ने ऑडिट रिपोर्ट नहीं की जारी
जब ऑक्सीजन का विकराल संकट था उस दौर में ऑक्सीजन की कालाबाजारी और बर्बादी की जांच के लिए प्रशासन ने कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन ऑडिट कराया था। सिलिंडर सप्लाई करने वाले वेंडर्स का भी ऑडिट हुआ। दो महीने बीतने के बाद भी जिला प्रशासन ने अस्पतालों व वेंडर की ऑक्सीजन ऑडिट रिपोर्ट जारी नहीं की। ऐसे में उन दिनों हुए फर्जीवाड़े की जांच दब गई।

सात मई के बाद बना पक्का हिसाब  
सात मई के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति के लिए प्रशासन ने अधिकारियों को नामित किया। तीन शिफ्ट में उनकी ड्यूटी लगाई। तब सिलिंडर आपूर्ति के समय वाहन नंबर, हॉस्पिटल का विवरण व सिलिंडर ले जाने वाले व्यक्ति के नाम-पते व अन्य जानकारी दर्ज की गई। सात मई से 15 मई तक पक्का लेखा-जोखा बना। जिसे प्रशासन ने वेबसाइट पर अपलोड किया था।
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‘खर्चा  रोज का 50 हजार आएगा बिल 18 हजार रुपये का ही देंगे’
श्री पारस अस्पताल में दूसरी लहर में इलाज के नाम पर मरीजों से मनमानी धनराशि वसूली गई। हॉस्पिटल में भर्ती रहे मरीजों के परिजनों ने आईएमए की जांच समिति के सदस्यों को पूछताछ में यह बताया है। मरीजों के परिजनों के अनुसार, उनसे कहा गया था कि बिल 18 हजार रुपये का ही देंगे, लेकिन खर्चा रोजाना का 40 से 50 हजार रुपये का आएगा। मजबूरी में उन्होंने बता मानी।

आईएमए की जांच समिति डॉ. अरिंजय जैन की ओर से उपलब्ध कराई 91 मरीज और उनके परिजनों से फोन पर बात कर रही है। कई मरीजों के परिजनों ने बताया कि जब हम अपने मरीज को भर्ती करने आए तो स्टाफ ने बेड और ऑक्सीजन की कमी बताई। 

गुहार लगाने पर भर्ती किया, लेकिन कहा कि बिल 18 हजार रुपये रोज का देंगे लेकिन खर्चा 40 से 50 हजार रुपये का आएगा, सोच लो। उस वक्त कोरोना का कहर बरपा रहा था। सिफारिशों पर भी बेड नहीं मिल रहे थे। मजबूरी थी जान बचाने के लिए उनकी सभी बातों पर रजामंदी दे दी।  

मरीजों ने ये दी जानकारी
- ऑक्सीजन की कमी थी, खुद के सिलिंडर लेकर आए, 30 हजार रुपये में एक सिलिंडर मिला। सिलिंडर लाने के कुछ देर बाद ही बताया कि मरीज की मौत हो गई।
- 26 अप्रैल की सुबह 10:30 बजे अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए। पूछने पर तकनीकी गड़बड़ी बताई।  
- 26 अप्रैल की सुबह अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था, स्टाफ कुछ भी बता नहीं रहा था। उस समय डॉ. अरिन्जय जैन भी अस्पताल में मौजूद थे।
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