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दुनिया भर में चमका आगरा का जूता, साढ़े सात हजार करोड़ का कारोबार, तीन लाख लोगों को रोजगार

Fri, 17 Jul 2020 11:33 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

तीन लाख लोगों को रोजगार दे रहा, 80 फीसदी निर्यात यूरोपियन देशों में
 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी का जूता दुनिया भर में चमक रहा है। उद्यमियों ने अपने दम पर जूता कारोबार को सालाना 7.5 हजार करोड़ टर्नओवर तक पहुंचा दिया है। करीब तीन लाख लोगों को इससे रोजगार मिल रहा है। कच्चे माल के लिए पहले काफी हद तक चीन पर निर्भरता थी, लेकिन अब उद्यमियों ने विकल्प तलाश लिए हैं।
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एफमैक के अध्यक्ष पूरन डावर ने बताया कि हमने ठान लिया है कि चीन से आयात शून्य पर लाना है। देश में ही कच्चा माल बनने लगा है। इधर, मशीनों का विकल्प वियतनाम है जो उसी मूल्य और गुणवत्ता की मशीन उपलब्ध करा रहा है जो चीन में मिल रहा था।

चीन से पलायन कर रही हैं कंपनियां
चीन से यूरोपियन कंपनियां में पलायन कर रही हैं। इसका लाभ हमें मिलेगा। उन्होंने बताया कि लेदर के फुटवियर बनाने में। विदेशी बाजार में हम आगे हैं। लेकिन सिंथेटिक लेदर बनाने में 80 फीसदी चीन का कब्जा है - पूरन डाबर, अध्यक्ष एफमैक 
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सरकार का साथ चाहिए
जूता उद्योग को और बेहतर करने के लिए सरकार का साथ चाहिए। मसलन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर हमें इंसेंटिव मिलना चाहिए। इससे बहुराष्ट्रीय कंपनियां आकर्षित होंगी। आगरा के जूते में क्वालिटी है, इसलिए उसे बाजार में पसंद किया जाता है। -गोपाल गुप्ता, उपाध्यक्ष एफमैक।

कम ब्याज दर पर मिले ऋण
चीन से मुकाबला करने को वैसा ही इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की आवश्यकता है। इसके तहत सस्ती ब्याज दर पर ऋण दिलाया जाए। इसके अलावा कोरोना से प्रभावित यातायात व्यवस्था मसलन ट्रेन और फ्लाइट को सुचारु किया जाए। - गागन दास रामानी, अध्यक्ष शू फैक्टर्स फेडरेशन।

चीन से मोहभंग हो गया
पिछले दो दशक से चीन का भारतीय बाजार पर दखल है। आगरा में भी कच्चा माल चीन से आ रहा था, मगर, गलवान की घटना के बाद उद्यमियों का रुझान चीन से सामान को लेकर खत्म हुआ है। सब स्वदेशी कच्चा माल चाह रहे है। इस उत्साह को और बढ़ाते हुए अपने उत्पाद, मशीन और रॉ मैटेरियल पर काम करना है - जितेंद्र त्रिलोकनी, उद्यमी।
 
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एक नजर
150 निर्यात इकाइयां, 4500 करोड़ का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निर्यात
5000 घरेलू कारखाने, 3000 करोड़ का टर्नओवर।
आगरा से 65 फीसदी घरेलू बाजार में होती है जूते की आपूर्ति।
औसतन 10 करोड़ रुपये का कच्चा माल हर महीने लग जाता है।

ये मांग: 
1. स्वदेशी रॉ मटेरियल और कंपोनेंट्स को चीन का विकल्प पूरी तरह से बनाने को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो
2. रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर मिले इंसेंटिव।
3. नए प्रोजेक्ट्स के निवेश पर आयकर में मिले छूट।
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