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UP: हवा में जहर, पानी भी दूषित और बंजर मिट्टी, बीमार हो रही धरती और बेबस इंसान; पृथ्वी दिवस पर विशेष रिपोर्ट

Wed, 22 Apr 2026 10:02 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा में हवा, पानी और मिट्टी तीनों गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुके हैं, जिससे 12 ब्लॉक डार्क जोन में शामिल हो गए हैं। भूजल जहरीला होने, वायु प्रदूषण बढ़ने और मिट्टी की उर्वरता घटने से खेती, स्वास्थ्य और पर्यावरण तीनों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
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आगरा यमुना नदी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 धरती बीमार है। इंसान बेबस। क्योंकि हवा, पानी और मिट्टी में जहर घुल रहा है। कुदरत के इन तीनों आधारों की बिगड़ती सेहत एक तरफ विनाश को न्योता दे रही है, दूसरी तरफ उपायों के नाम पर हो रही खानापूर्ति की हकीकत भी उजागर कर रही है। जिले में 15 में 12 ब्लॉक डार्क हैं। जहां रिचार्ज से ज्यादा दोहन हो रहा है। यमुना, उटंगन, खारी नदियां प्रदूषित हैं। मृदा तत्व खत्म होने से खेती बंजर हो रही है।
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मिट्टी: बंजर हो रहे खेत, घट रही पैदावार
मिट्टी की सेहत दिन प्रति दिन बिगड़ रही है। बंजर भूमि का रकवा बढ़ रहा है क्योंकि कृषि भूमि क्षारीय हो गई है। इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मिट्टी का पीएच सात से कम होना चाहिए। जिले में यह स्तर सामान्यत: 7.8 से 8.5 के बीच है। जबकि कुछ ऊसर क्षेत्रों में यह 8.5 से भी अधिक है। मिट्टी में जिंक, लोहा और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व गायब हो गए हैं। डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए एकमात्र उपाय बताया है। हरी खाद, गोबर की खाद और फसल अवशेषों का उपयोग किया जा सकता है।
 

पानी: खारा भूजल बांट रहा बीमारियां
फ्लोराइड जैसे तत्वों की अधिकता से पट्टी पचगई गांव में बूढ़े, बच्चे और जवान विकलांग हो गए हैं। उनकी हड्डियां तक टेढ़ी पड़ गई हैं। भूगर्भ जल विज्ञानी शशांक सिंह ने बताया कि वर्षा जल संचयन से भूजल स्तर में सुधार हो रहा है, लेकिन भूजल की गुणवत्ता नहीं बदल रही। खेरागढ़, अकोला और फतेहपुर सीकरी ब्लॉक क्रिटिकल और एत्मादपुर, खंदौली, बिचपुरी, शमसाबाद, फतेहाबाद में स्थिति चिंताजनक है।

हवा: सूक्ष्म कणों के साथ कार्बन कणों से बढ़ा खतरा
वायु प्रदूषण से जूझ रही ताजनगरी में एक तरफ अफसर कागजी आंकड़ेबाजी में माहिर हैं, दूसरी तरफ अति सूक्ष्म कणों के साथ अब हवा में तैर रहे कार्बन कण में भी खतरा साबित हो रही है। फेफड़ों रोगियों की संख्या बढ़ रही है। फेफड़ों में कैंसर के मामले बढ़े हैं। 12 महीने में 6 महीने शहर की हवा सांस लेने लायक नहीं रही। हवा में सल्फर जैसे घातक तत्वों का स्तर भी मानक से अधिक हो जाता है। यह हाल तब है जब ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल की परिधि से 50 किमी. क्षेत्र को पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील घोषित कर रखा है। तमाम तरह के प्रतिबंध लागू हैं। फिर भी वायु प्रदूषण का मर्ज लाइलाज साबित हो रहा है।
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दो साल में बढ़ी 12 वर्ग किमी. हरियाली
धरातल पर भले ही हरियाली नजर नहीं आए, लेकिन वन विभाग के आंकड़ों में पिछले दो साल में करीब 12 वर्ग किमी. हरित क्षेत्र बढ़ गया है। जिले का क्षेत्रफल 4041 वर्ग किमी. है। भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2011 में हरित क्षेत्र 6.85 फीसदी यानी 276 वर्ग किलोमीटर था, 2021 तक इसमें लगातार गिरावट आई। 2021 में क्षेत्रफल 276 से घटकर 262.62 वर्ग किलोमीटर रह गया था। इसके बाद 2023-24 की रिपोर्ट में 12.90 वर्ग किमी. हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है।
 
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