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नामी बोतलों में बेचते थे घटिया सस्ती शराब, आलीशान कोठी में चला रहे थे 'कारोबार'

Thu, 30 May 2019 10:28 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा पुलिस और आबकारी ने बरामद की तस्करी की शराब - फोटो : अमर उजाला
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शहर में विदेशी मदिरा के महंगे ब्रांड की बोतलों में हरियाणा की घटिया और सस्ती शराब बेचे जाने का खुलासा हुआ है। पुलिस और आबकारी विभाग की टीम ने न्यू आगरा के दीप विहार से ऐसे परिवार को पकड़ा है, जो 14 सालों से इस गोरखंधे में लगा था। ये लोग ब्रांडेड मदिरा की बोतलों में सस्ती शराब भरते थे। स्टिकर, लोगो, बार कोड ब्रांडेड शराब का लगाते थे। इनकी रोजाना लाखों की कमाई हो रही थी।
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गिरफ्तार आरोपियों में न्यू आगरा के दीप विहार का अजय तोमर, उसकी पत्नी रेनू तोमर, बेटा पृथ्वीराज तोमर, भतीजा उदय तोमर हैं। ये लोग मूल रूप से मुरैना के अंबा बिहार के रहने वाले हैं।

दीप विहार में 14 साल से रह रहे हैं। इतने लंबे समय से अवैध शराब के कारोबार में लगे थे लेकिन, पकड़ में अब आए हैं। अब भी तब पकड़े गए हैं जब बाराबंकी में शराब से 23 लोगों की मौत के बाद आगरा में भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान चलाया गया।
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अजय तोमर के घर से शराब की 185 पेटियां बरामद की गई हैं। ये हरियाणा की शराब की एक घटिया ब्रांड की हैं। घर से 2000 क्यूआर कोड मिले हैं जो महंगी ब्रांडेड शराब कंपनियों के हैं।

इंस्पेक्टर न्यू आगरा थाना अजय कौशल ने बताया कि एक सटीक सूचना पर इन लोगों को पकड़ा गया। इनसे पूछताछ की जा रही है। अभी और भी खुलासे हो सकते हैं।

होटल और बार में लोग ब्रांडेड शराब का पैसा देते हैं लेकिन, कई जगह इसी तरह की घटिया शराब परोसी जा रही है ब्रांडेड के नाम पर। अजय तोमर से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि वह होटलों और बार में शराब की सप्लाई कर रहा था। महंगी के नाम पर सस्ती और घटिया शराब बेची जा रही थी। इस रैकेट में और भी लोग शामिल हैं। वे नहीं पकड़े गए हैं।

हरियाणा की शराब की जो बोतल 120 रुपये में इन्हें मिलती थी, उसे ये धंधेबाज 700 से 800 रुपये तक में बेच रहे थे। इसके लिए ब्रांडेड बोतल में इस शराब को भर देते थे। घर में मशीनें लगी हुई थीं। हर बोतल पर 500 से 600 रुपये बच रहे थे। रोजाना की कमाई लाखों में थी।

अजय तोमर ने अपने एक रिश्तेदार की 200 वर्ग गज की कोठी किराए पर ले रखी थी। इसी में यह गोरखधंधा 14 सालों से कर रहा था। पहले छोटे स्तर पर काम किया, फिर धीरे धीरे फैलता रहा। धंधे में सौ से ज्यादा लोग जोड़ चुका था।


 
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