श्री पारस अस्पताल: डीवीआर ले जाता पुलिसकर्मी (फाइल)
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आगरा के श्री पारस अस्पताल में ऑक्सीजन बंद करने की वजह से अपनों को खो दिया। थाने से लेकर अधिकारियों के दफ्तर में शिकायत की सुनवाई नहीं हो रही है। हमें न्याय चाहिए, मुकदमा दर्ज क्यों नहीं कर रही पुलिस। सोमवार को एसएसपी ऑफिस में चार पीड़ितों ने यही कहा।
वह युवा अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधिमंडल के साथ एसएसपी से मिलने पहुंचे थे। उनके नहीं मिलने पर एसपी प्रोटोकॉल को प्रार्थनापत्र देकर कार्रवाई की मांग की। शाम को अधिवक्ता आईजी रेंज नवीन अरोरा से मिले। उनसे मामले में कार्रवाई की मांग की।
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि सोमवार को दोपहर 12:30 बजे एसएसपी मुनिराज जी से मिलने गए थे। उनसे मिलने के लिए समय भी ले रख था। मगर, एसएसपी मिले नहीं। इस पर एसपी प्रोटोकॉल शिवराम यादव से मुलाकात की।
पहले वो प्रार्थनापत्र नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने सीएमओ की जांच की बात कही। इस पर उन्हें बताया कि पीड़ितों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। इस पर उनका प्रार्थनापत्र लिया गया। चार पीड़ित अशोक चावला, राजू यादव, पियूष तिवारी और क्षितिज शर्मा ने भी अपनी बात रखी।
'आईएमए को नहीं हमारे दर्द का एहसास'
इटावा राजू यादव ने कहा कि आईएमए को हमारे दर्द का एहसास ही नहीं है। मेरी बहन की जिंदगी बर्बाद हो गई। 30 साल के बहनोई को जब भर्ती कराया था तो लगा था तीन-चार दिन में ठीक हो जाएंगे। उन्हें कोई गंभीर समस्या नहीं थी। 26 को उनकी मौत हो गई। हमें दूसरे दिन 27 अप्रैल को बताया गया। जांच के नाम पर अंधेरगर्दी हो रही है।
'लापरवाही ने छीन लिया मेरा सपूत'
मैनपुरी के दूरबीन सिंह ने कहा कि मेरा बेटा सनोज कुमार 26 साल का था। 26 अप्रैल को श्री पारस में उसकी मौत हो गई। घर का खर्च वहीं चलाता था। उसकी 27 जून को शादी होने वाली थी। उसने बहन के लिए भी लड़का देखा था। उसकी शादी करता उससे पहले ही मेरा बेटा ऑक्सीजन न मिलने और लापरवाही की वजह से इस दुनिया से चला गया।
'जांच के नाम पर हो रहा मजाक'
मधु नगर के नत्थीलाल त्यागी ने कहा कि श्री पारस अस्पताल की मॉकड्रिल की जांच के नाम पर आईएमए मजाक कर रहा है। जानबूझ कर लीपापोती कर रहे हैं। चिकित्सकों द्वारा की जांच में चिकित्सक को कैसे दोषी ठहरा सकते हैं। मेरी पत्नी ने 26 अप्रैल को दम तोड़ा था। उसके नौ दिन बाद मेरे बेटे की मौत हो गई। मैं बीमार हूं क्या कर सकता हूं।
'आईएमए का दामन है खुद दागदार'
दहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि आईएमए पदाधिकारियों का दामन खुद दागदार है। उन्होंने मरीजों से मनमानी वसूली की। आपदा को अवसर बनाया। अब वो क्या जांच करेंगे। हॉस्पिटल की लापरवाही से मेरी मां मर गई। जांच के नाम पर आईएमए चिकित्सक को बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्हें मॉकड्रिल करने का अधिकार किसने दिया, ये अन्याय है।
'तीन विशेषज्ञ लेते हैं आकस्मिक निर्णय'
चिकित्सा मामलों के विधि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र गुप्ता ने कहा कि चिकित्सकीय पेशे में कोई चिकित्सक अकेले मॉकड्रिल करने का निर्णय नहीं ले सकता। इसके लिए तीन विशेषज्ञ एमडी मेडिसिन, एनीस्थीसिया और सर्जन का मौजूद रहना जरूरी है। वहीं निर्णय ले सकते हैं कि आपात स्थिति में क्या करना चाहिए। किसी मरीज की ऑक्सीजन बंद करने का अधिकार किसी को नहीं होता।