सवाल: ये कैसी जांच
- 96 मरीज क्या अकेले डॉ. अरिंजय जैन के अंडर में भर्ती थे।
- अगर नहीं, तो 96 मरीजों के उपचार के लिए कितने डॉक्टर थे।
- 22 मरीज गंभीर थे, जिनमें 16 की मौत हुई बाकी का क्या हुआ।
- मरीजों की बीएचटी पर डॉक्टर ने क्या नोट्स व ट्रीटमेंट लिखे।
- डेथ ऑडिट व जांच टीमों ने क्या किसी ड्यूटी डॉक्टर के बयान लिए।
- डेथ ऑडिट कमेटी ने सभी मृतकों का ऑडिट क्यों नहीं किया।
- क्या आईसीयू मानक सही थे, अगर नहीं तो क्या ये लापरवाही नहीं।
- ऑडिट में आरोपित संचालक के परिचित डॉक्टर क्यों शामिल हैं।
ऑक्सीजन की कमी मानी, लेकिन मौतें नहीं
जिला प्रशासन ने अस्पताल संचालक को जांच में ऑक्सीजन की कमी का हवाला देकर मरीजों में भ्रम फैलाने का दोषी माना है। लेकिन मॉकड्रिल के वायरल वीडियो में संचालक के उस कथित बयान को नजर अंदाज कर दिया जिसमें वह कह रहे हैं कि ट्रायल मार लेते हैं...जितने बचने होंगे बच जाएंगे...। यहां सवाल उठ रहा है कि इस पहलू पर जांच क्यों नहीं की गई।