पूछताछ में पता चला कि गैंग हाईवे और एक्सप्रेसवे पर लूट करता है। वाहनों को पंक्चर करने के लिए टायर किलर लगाते थे। इसके लिए दो टीमों में पांच से दस किलोमीटर दूर गैंग के सदस्य बंट जाते थे। एक टीम कार के टायरों को पंक्चर करती थी। दूसरी टीम पंक्चर टायर के रुकने का इंतजार करती थी। फोन से बदमाश एक दूसरे के संपर्क में रहते थे। बदमाश पैदल आते थे। देहात के इलाकों से निजी वाहनों से चले जाते थे। इस कारण पकड़े नहीं जाते थे।
हाईवे और एक्सप्रेसवे के सफर में इन बातों पर रखें ध्यान
- सुनसान स्थान पर गाड़ी को नहीं रोकें।
- पुलिस पिकेट तक गाड़ी को किसी तरह लाएं।
- पुलिस, हाईवे, एक्सप्रेस वे के कंट्रोल रूम पर सूचना दें।
- बदमाश कृष्ण पक्ष एवं शुक्ल पक्ष की तृतीय से पंचमी और दशमी से द्वादशी के मध्य गैंग घटना करता है।