राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का समरसता संगम लोकसभा चुनाव 2019 की इबारत लिखेगा। इस आयोजन में एक ओर जहां मातृ शक्ति को जोड़ा जा रहा है तो वहीं संत समाज की भी अहम भूमिका होगी।
चूंकि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, ऐसे में भाजपा के लिए यह आयोजन महत्वपूर्ण है। 23 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी संघ प्रमुख की बैठक में हिस्सा लेंगे।
अहम बात यह है समरसता संगम में स्वयंसेवकों के अलावा भाजपा के नेताओं को भी जिम्मेदारी सौंपी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक नगर निगम में भाजपा के 53 पार्षद हैं, उन्हें भी 150-150 नये स्वयंसेवकों को गणवेश धारण कराकर लाने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष, विधायक, सांसद और अन्य पदाधिकारियों को भी गणवेश धारी स्वयंसेवकों को लेकर समरसता संगम में पहुंचने का लक्ष्य दिया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समरसता संगम में तो शामिल नहीं होंगे, लेकिन वे 23 फरवरी को संघ प्रमुख से मिलेंगे। योगी की संघ प्रमुख से मुलाकात के भी मायने खोजे जा रहे हैं। कार्यक्रम में संतों को बड़े पैमाने पर शामिल किया जा रहा है।
राष्ट्र और हिंदुत्व की रक्षा ही समरसता संगम का केंद्र बिंदु है। प्रदेश के कई जिलों में ऐसे आयोजन हो रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 23 फरवरी को बिचपुरी में संघ प्रमुख से मुलाकात के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन में सरगर्मी बढ़ गई है।
बुधवार को अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का दौरा किया तो वहीं एयरपोर्ट से बिचपुरी तक मार्ग का जायजा लिया है। दरअसल सीएम को मथुरा जाना है, इसलिए पहले एयरपोर्ट से बिचपुरी, उसके बाद मथुरा जाने के मार्ग को भी फाइनल किया जा रहा है।