- ट्राएज ओपीडी की व्यवस्था कर बुखार-जुकाम, खांसी समेत कोरोना वायरस के लक्षणों वाले संदिग्ध मरीजों की स्क्रीनिंग की जाए।
- लक्षण मिलने पर संदिग्ध मरीज को भर्ती करते हुए ट्रू नॉट मशीन से जांच हो, जिससे घंटे-दो घंटे में रिपोर्ट आने के बाद इलाज शुरू हो सके।
- आइसोलेशन वार्ड में प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थिएटर, डायलिसिस की व्यवस्था। स्टाफ की रोस्टर प्लान से ड्यूटी दी जाए।
जनप्रतिनिधियों ने उठाए थे सवाल
'आगरा' मॉडल पर राज्यमंत्री, सांसद और विधायकों ने सवाल उठाए थे। अप्रैल-मई में रोज 30 से 40 केस मिल रहे थे। जनप्रतिनिधियों ने बैठक कर पूछा था कि यह कैसा आगरा मॉडल है, जिससे संक्रमण रुक ही नहीं रहा।
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जिस आगरा मॉडल पर अप्रैल और मई में सवाल उठ रहे थे, उसे शासन के फिर से पसंद करने की वजह इस बार आगरा में केस दोगुना होने में 60 दिन का समय लगना है।
पांच मई को संक्रमितों की संख्या 640 थी, पांच जुलाई को 60 दिन बाद यह 1280 हुई। इससे पहले ये 15 दिन में दोगुना हुए थे। अप्रैल और मई में तो सात दिन में ही दोगुना हो गए थे। अब सिर्फ 3.04 फीसदी सैंपल पॉजिटिव आ रहे हैं।
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डीएम प्रभु एन सिंह का कहना है कि संक्रमण की रफ्तार बढ़ने की चार वजह थीं। पहले सैंपल टेस्ट के लिए पुणे व केजीएमयू भेजे जा रहे थे। टेस्ट में देर हो रही थी। दूसरा कारण था कि संक्रमण की एक के बाद एक चेन बन रहीं थी। इसे पूल टेस्टिंग से रोका गया।
तीसरा कारण, क्वारंटीन सेंटर्स में संक्रमण फैलना था। मई में पॉलिसी बदली। क्वारंटीन सेंटर्स की जगह होम क्वारंटीन व्यवस्था की। इससे जून में संक्रमण की चेन टूट गई। चौथा कारण हेल्थ वर्कर्स और चिकित्सकों का कम संख्या में प्रशिक्षित होना था। हमने उनके विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था की। वे संक्रमण से बचे।
अप्रैल में एक दिन में दोगुना हो गए थे संक्रमित
| कोरोना के केस |
तारीख |
दोगुने होने में समय |
| 05 |
दो मार्च |
- |
| 10 |
26 मार्च |
24 दिन |
| 20 |
1 अप्रैल |
06 दिन |
| 46 |
2 अप्रैल |
01 दिन |
| 83 |
7 अप्रैल |
05 दिन |
| 167 |
14 अप्रैल |
07 दिन |
| 320 |
20 अप्रैल |
06 दिन |
| 640 |
5 मई |
15 दिन |
| 1280 |
5 जुलाई |
60 दिन |