आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन सीट से सपा के शिक्षक प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल की जीत की कहानी राजनीतिक दलों के समीकरणों से आगे वोट बैंक तैयार करने की रणनीति तक पहुंचती है। 2020 में निर्दलीय चुनाव लड़ने के बाद मिली जीत डॉ. आकाश अग्रवाल की उनके खुद के बनाए वोट बैंक के दम पर थी।
सूत्रों के अनुसार, बीते दो साल से डॉ. आकाश अग्रवाल भाजपा के संपर्क में थे। इस दौरान शिक्षकों के बीच अपनी पैठ बनाते रहे। इसमें भाजपा के नेताओं से भी उन्हें सहयोग मिलता रहा लेकिन आखिरी समय में भाजपा ने हरिकिशोर तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया।
इसके बाद डॉ. आकाश अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी से संपर्क किया तो सपा ने माैजूदा एमएलसी पर दांव लगाना ज्यादा सुरक्षित समझा। तुरंत पहले से घोषित प्रत्याशी डाॅ. चंद्र प्रकाश गुप्ता की जगह डॉ. आकाश अग्रवाल को टिकट दे दिया। डाॅ. आकाश अग्रवाल द्वारा भाजपा के लिए की गई तैयारी का फायदा सपा को मिला और विधान परिषद में पार्टी के संख्या बल में बढ़ोतरी हो गई।
आगरा जिले में करीब 40 राजकीय विद्यालय, 109 सहायता प्राप्त इंटर कॉलेज और 920 वित्तविहीन विद्यालय हैं। विद्यालयों की संख्या के लिहाज से वित्तविहीन क्षेत्र काफी बड़ा है। डाॅ. आकाश अग्रवाल ने इसी वर्ग के शिक्षकों के बीच अपनी पकड़ बनाने पर जोर दिया। वह न सिर्फ वित्तविहीन शिक्षकों के हमदर्द बने बल्कि उनके वोट भी बनवाए। वित्तविहीन शिक्षकों की मदद से ही उनकी जीत सुनिश्चित हुई।
फर्जी वोटरों की शिकायत में भी अलग दिखे समीकरण
चुनाव से पहले मतदाता सूची में फर्जी वोटर बनाए जाने का मुद्दा भी उठा था। वित्तविहीन विद्यालयों से जुड़े कथित फर्जी मतदाताओं के मामले को अमर उजाला ने भी प्रमुखता से उठाया था। खास बात यह है कि जब समाजवादी पार्टी से पूर्व जीआईसी प्राचार्य डाॅ. चंद्र प्रकाश को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा चल रही थी तब उन्होंने भी फर्जी मतदाताओं को लेकर शिकायत की थी।
हरिकिशोर तिवारी ने भी इस मामले में शिकायत की थी। उस समय हरिकिशोर तिवारी किसी राजनीतिक दल में नहीं थे। शिकायतों के बाद मतदाता सूची संशोधित हुई और जिले में शिक्षक मतदाता 16,380 से घटकर 15,788 रह गए।
वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेसवार्ता के दौरान आगरा में करीब 10 हजार फर्जी वोटर बनाए जाने का आरोप लगाया था। पूरे प्रकरण में डॉ. आकाश अग्रवाल की ओर से फर्जी वोटर के संबंध में कोई शिकायत नहीं की गई थी।
डॉ. चंद्र प्रकाश की मेहनत का भी मिला फायदा
पूर्व जीआईसी प्राचार्य चंद्र प्रकाश की सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती थी। उनके अनुभव और पुराने संपर्क को देखते हुए सपा ने उन्हें प्रत्याशी घोषित किया था लेकिन आखिरी समय में डॉ. आकाश अग्रवाल को टिकट दे दिया। साथ ही डॉ. चंद्र प्रकाश की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सचिव बना दिया।
ऐसे में टिकट कटने के बाद भी चंद्र प्रकाश सपा प्रत्याशी के समर्थन में जुटे रहे। चंद्र प्रकाश के पास सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों का आधार था और डॉ. आकाश अग्रवाल की ताकत वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षक थे। इस जुगलबंदी से सपा की राह और आसान हो गई।
जीत के बाद डॉ. आकाश अग्रवाल ने मतगणना प्रक्रिया को बताया निष्पक्ष
शिक्षक खंड निर्वाचन क्षेत्र से सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल के जीत के बाद सुर बदल गए। मंगलवार को उन्होंने मतगणना में धांधली के आरोप लगाए थे। बुधवार को जीत का प्रमाणपत्र मिलने के बाद मतगणना प्रक्रिया को निष्पक्ष बताते हुए कहा कि उन्हें लगभग 14 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए हैं और उनकी जीत का अंतर 4200 से अधिक वोटों का रहा है।
मतगणना स्थल पर मंगलवार रात हुए मारपीट प्रकरण पर उन्होंने कहा कि मतगणना कक्ष के भीतर की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जो स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि घटना की शुरुआत किसने की। उन्होंने कहा कि मतगणना कक्ष में पूरी प्रक्रिया कैमरों के सामने पारदर्शी तरीके से संपन्न हुई है।
जीत का अंतर 4000 से अधिक वोटों का होने के कारण कुछ खारिज हुए मतों का परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। विपक्षी दल द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष की ओर से कोई शिकायत दी गई है, तो उनकी ओर से भी स्थिति स्पष्ट करते हुए आवेदन दिया जाएगा। वीडियो रिकॉर्डिंग से यह साफ हो जाएगा कि हमला किसने किया और विवाद की वजह क्या थी।
चुनाव के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों पर व्यक्त की चिंता
अपने पूर्व बयानों के संदर्भ में बात रखते हुए डॉ. अग्रवाल ने कहा कि शासन-प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर जो धारणा उनके मन में थी, वह चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रमों से प्रभावित हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान शिक्षकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को डराया-धमकाया गया तथा बूथ कैप्चरिंग की कोशिशें की गईं। इन्हीं परिस्थितियों से उत्पन्न मानसिक तनाव और भावावेश के कारण उन्होंने धर्म परिवर्तन वाली प्रतिक्रिया दी थी।
वैश्य समाज के सम्मान से समझौता नहीं
डॉ. अग्रवाल ने वैश्य समाज के सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वर्ग अपने पुरुषार्थ, मेहनत और भामाशाह की दानवीर परंपरा के लिए पहचाना जाता है। समाज सेवा, धर्मशालाओं और अस्पतालों के संचालन में इस वर्ग का 50 प्रतिशत से अधिक योगदान है। उन्होंने कहा कि वैश्य अथवा अग्रवाल समाज को अनुचित टिप्पणी से जोड़ने का विरोध करना स्वाभाविक है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संसाधनों और क्षेत्रीय विषयों पर भी अपनी बात रखी।