उसका मोबाइल भी लगा नहीं। उसकी तलाश की, लेकिन मिला नहीं। दूसरे दिन थाना सिकंदरा में गुमशुदगी दर्ज कराई। उसकी तलाश में लगे हुए थे। जितेंद्र ने जाने से पहले अपनी ट्रांस यमुना कालोनी स्थित केनरा बैंक के लॉकर से 250 ग्राम सोने के जेवरात और दो लाख रुपये भी निकाले थे।
इंटरनेट पर देखा भाई का फोटो
शुक्रवार को लावारिस शवों की जानकारी के लिए पुलिस की वेबसाइट पर खोज रहे थे। तभी जिपनेट पर एक लावारिस शव का फोटो नजर आया। वह उनके भाई का ही था। शव 23 अगस्त की रात को नई दिल्ली के अजमेरी गेट रेलवे स्टेशन पर मिला था। चेहरे से पहचान होने पर जानकारी साझा करने वाले विवेचक के नंबर पर काल किया।
उसने फोटो मोबाइल पर भेज दिए। इससे मृतक की पहचान जितेंद्र के रूप में हो गई। दिल्ली पुलिस ने बताया कि उसके पास से पहचान का कुछ नहीं मिला था। इस कारण शव को लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया था। इससे परिवार में कोहराम मच गया। इस बारे में सिकंदरा पुलिस को भी जानकारी दी।
परिजन लगाते रहे थाने के चक्कर
मृतक के भाई चंद्रकांत शर्मा ने बताया कि जितेंद्र के लापता होने के बाद सिकंदरा पुलिस के रवैये से वो नाखुश हैं। आरोप लगाया कि पुलिस ने गुमशुदगी तो दर्ज की, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। वो खुद ही तलाश में लगे। जितेंद्र ने राजामंडी स्टेशन से दिल्ली की टिकट ली थी। उन्हें उसके फुटेज मिल गए। इस बारे में पुलिस को बताया। मगर, दिल्ली पुलिस से संपर्क नहीं किया गया। वह खुद ही दिल्ली गए।
अजमेरी गेट स्टेशन पर भी भाई के फुटेज मिले। उन्हें 50 बार दिल्ली जाना पड़ा। फुटेज में भाई स्टेशन के बाहर नजर आया था। इसके बावजूद पुलिस ने तलाश नहीं की। अधिकारियों से भी मिले। आनलाइन मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत की, लेकिन भाई की जानकारी नहीं लगी। उन्होंने जिपनेट पर देखकर भाई के शव की पहचान की।