आगरा मेट्रो की राह आसान नहीं है। प्रोजेक्ट के काम में दो दिक्कत एक साथ सामने आई हैं। एक, अधिकारियों ने प्रोजेक्ट को शुरू करने में देरी की। इस पर केंद्रीय आवास एवं शहरी नियोजन के सचिव दुर्गाशंकर मिश्रा ने गहरी नाराजगी जताई है।
दूसरा, अब तक मेट्रो का काम शुरू करने के लिए ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) की एनओसी तक नहीं ली गई। टीटीजेड की एनओसी तभी मिल सकती है जब इसकी निगरानी के लिए बनी सुप्रीम कोर्ट की अनुश्रवण समिति (मॉनीटरिंग कमेटी) से काम करने की अनुमति मिल जाए।
यूपी के मेट्रो प्रोजेक्टों की समीक्षा के लिए शुक्रवार को दुर्गाशंकर मिश्रा लखनऊ में थे। उन्होंने प्रदेश सरकार के अधिकारियों को टीटीजेड की अनुमति दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए। मेट्रो की तैयारियों की समीक्षा के दौरान उन्हें बताया गया कि आगरा मेट्रो के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनापत्ति मिल चुकी है।
उन्होंने कहा कि आगरा मेट्रो का काम जल्द से जल्द शुरू करना है। ऐसे में टीटीजेड केलिए स्वीकृति तुरंत मिलनी आवश्यक है। ताज से सिकंदरा के बीच 14 किमी लंबे भूमिगत व एलिवेटेड सेक्शन पर निर्माण शुरू होना है।
मेट्रो के लिए बन रहे टेंडर के नियम
प्रदेश सरकार आगरा मेट्रो प्रोजेक्ट पर शीघ्र काम शुरू कराना चाहती है, लेकिन अभी इनके लिए रॉलिंग स्टॉक, सिविल वर्क, ऑपरेशन से जुड़े टेंडर्स के दस्तावेज ही तैयार नहीं हो सके हैं। एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने आवास सचिव को बताया कि टेंडर्स के नियम-शर्तें तय की जा रही हैं। इसमें तीन माह का समय लग सकता है। इसके बाद ही टेंडर जारी होंगे।
जमीन का अधिग्रहण शुरू कराएं
आवास सचिव ने कुमार केशव और आवास विभाग की विशेष सचिव माला श्रीवास्तव को आगरा व कानपुर मेट्रो के लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू कराने के लिए कहा है। इसके बाद ही तेजी से काम हो पाएगा। आगरा में फिलहाल अधिग्रहण के लिए सर्वे का काम चल रहा है।
आसान नहीं मेट्रो की राह
- मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए सीमेंट, कंक्रीट के लिए प्लांट लगाना होगा। टीटीजेड में नए कारखाने या प्लांट लगाने पर तदर्थ रोक है।
- रोक के दायरे में आने वाले हर काम पर एलएनआरसी को केंद्र के पर्यावरण, वन एवं जलवायु मंत्रालय से अनापत्ति लेनी होगी।
- टीटीजेड में लगी तदर्थ रोक के मद्देनजर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्थिति स्पष्ट करानी होगी।
- टीटीजेड में वृक्ष काटने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट से लेनी होती है। मेट्रो के लिए यह अनुमति भी शीर्ष अदालत से लेनी होगी।