आगरा के बोदला (जगदीशपुरा) के चर्चित 10 हजार वर्ग जमीन पर कब्जे के मामले में मुख्य आरोपी बिल्डर कमल चौधरी और उसके बेटे धीरू चौधरी को एक माह में भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। दबिश और कुर्की की कार्यवाही करती रह गई, जबकि दोनों आरोपियों को हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर स्थगनादेश मिल गया। कोर्ट ने दोनों को मुकदमे की विवेचना में पुलिस का सहयोग करने का आदेश दिया है। ऐसा नहीं करने पर पुलिस कोर्ट को अवगत कराएगी।
बोदला में जमीन पर अवैध कब्जा करने और फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर निर्दोष चौकीदार व उसके परिजन को जेल भिजवाने के मामले में बिल्डर कमल चौधरी, उसके बेटे धीरू चौधरी सहित 18 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया गया था। पुलिस इस मामले में तत्कालीन एसओ जितेंद्र सिंह, पहलवान पुरुषोत्तम, अमित अग्रवाल को जेल भेज चुकी है। पिता-पुत्र फरार हैं।
कमल चौधरी की तरफ से अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में मुकदमा खारिज करने के लिए याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि अमर सिंह, टहल सिंह उसके भाई नाहर सिंह और पदम कुमार जैन, प्रमोद कुमार जैन, प्रभात कुमार जैन, नेमचंद जैन और अभय कुमार जैन के बीच 1974 में एक साझेदारी फर्म खोली गई थी। यह 1980 में खत्म हो गई। टहल पक्ष ने रुपये और दूसरा सामान ले लिया। जमीन दूसरे पक्ष को मिली थी। याचिका में यह कहा गया कि उमा देवी को मुकदमा लिखाने का अधिकार ही नहीं है। जमीन पर उनका कोई हस्तक्षेप नहीं है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद बिल्डर पिता-पुत्र की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। स्टे की ऑनलाइन प्रति पुलिस को भी मिल गई है। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर अमल किया जाएगा। बिल्डर पिता-पुत्र को विवेचना में सहयोग करना होगा।
मुनादी भी कराई मगर पकड़ नहीं पाई
चर्चित मामले में दर्ज मुकदमे के मुख्य आरोपी के घर पुलिस ने दो बार दबिश दी मगर वह हाथ नहीं लगा। इसके बाद कई जगह दबिश का दावा किया गया मगर इतना समय दिया गया कि वह हाईकोर्ट में पैरवी कर सके। हुआ भी यही। वहीं इसी मुकदमे में प्रकाश में आए किशोर बघेल को भी पुलिस अभी तक नहीं पकड़ सकी है। वह भी फरार है। वह कब्जे के बाद प्लाॅट से सामान उठाकर ले गया था।