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कंगालपाड़ा: आगरा में भिखारियों के लिए बसाया गया था यह मोहल्ला, रोचक है इसका इतिहास

Tue, 19 Jan 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा का मोहल्ला कंगालपाड़ा - फोटो : अमर उजाला
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ऐतिहासिक शहर आगरा के कई बाजार, मंडी और इलाकों के नामकरण की रोचक कहानी है। इनका इतिहास भी मुगलकाल से जुड़ा हुआ है। दरअसल मुगल बादशाह अकबर के दौर में शहर में सबसे ज्यादा बस्तियां, इलाके और बाजार बनाए गए और बसाए गए। यहां तक कि भिखारियों के लिए भी एक मोहल्ला बना था। इसका नाम है कंगालपाड़ा। भिखारी अकबर के पास दरख्वास्त (गुहार) लेकर पहुंचे थे कि उनके पास रहने के लिए जगह नहीं है। 

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इतिहासकार राजकुमार शर्मा राजे ने बताया कि जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर ने भिखारियों को रहने के लिए एक जगह दी। यह मंटोला के पास है। भिखारियों के यहां रहने के कारण ही इसका नाम कंगालपाड़ा पड़ गया। यहां के भिखारियों को खाना हुकूमत की तरफ से मिलता था। मंटोला भी अकबर के समय में बना। यहां अकबर ने अर्मीनिया से आए लोगों को जगह दी थी। अर्मीनिया की भाषा में मंटोला का अर्थ होता है गले का हार।

कंगालपाड़ा में हैं जूते के 12 कारखाने 
कंगालपाड़ा के नंदलाल भारती ने बताया कि यहां की पांच हजार की आबादी में 75 फीसदी कोरी समाज और 25 फीसदी मुस्लिम हैं। बड़ी आबादी मजदूरों की है, कारीगर और मिस्त्री भी हैं। कोरी समाज के लोग मुगलकाल में बुनाई का काम करते थे। अब ये अलग-अलग चीज के मिस्त्री हैं। यहां जूते के 12 कारखाने हैं। इनमें भी बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं। यहां सामुदायिक भवन भी बना हुआ है। 

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नाई की मंडी में बसाया गया था गुजरातीपाड़ा
नाई की मंडी में एक मोहल्ले का नाम है गुजरातीपाड़ा। इसके नाम से ही लगता है कि इसका संबंध गुजरात से है। ऐसा है भी। मुगल बादशाह अकबर ने सन 1572-73 में गुजरात पर विजय प्राप्त की। अगले ही साल गुजरात में अकाल पड़ गया। लोग पलायन करने के लिए मजबूर हो गए थे। बड़ी संख्या में गुजराती ब्राह्मण आगरा आए। ये लोग नाई की मंडी में जहां बसे, वही गुजरातीपाड़ा कहलाया। 
 
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