ऐतिहासिक शहर आगरा के कई बाजार, मंडी और इलाकों के नामकरण की रोचक कहानी है। इनका इतिहास भी मुगलकाल से जुड़ा हुआ है। दरअसल मुगल बादशाह अकबर के दौर में शहर में सबसे ज्यादा बस्तियां, इलाके और बाजार बनाए गए और बसाए गए। यहां तक कि भिखारियों के लिए भी एक मोहल्ला बना था। इसका नाम है कंगालपाड़ा। भिखारी अकबर के पास दरख्वास्त (गुहार) लेकर पहुंचे थे कि उनके पास रहने के लिए जगह नहीं है।
इतिहासकार राजकुमार शर्मा राजे ने बताया कि जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर ने भिखारियों को रहने के लिए एक जगह दी। यह मंटोला के पास है। भिखारियों के यहां रहने के कारण ही इसका नाम कंगालपाड़ा पड़ गया। यहां के भिखारियों को खाना हुकूमत की तरफ से मिलता था। मंटोला भी अकबर के समय में बना। यहां अकबर ने अर्मीनिया से आए लोगों को जगह दी थी। अर्मीनिया की भाषा में मंटोला का अर्थ होता है गले का हार।
कंगालपाड़ा में हैं जूते के 12 कारखाने
कंगालपाड़ा के नंदलाल भारती ने बताया कि यहां की पांच हजार की आबादी में 75 फीसदी कोरी समाज और 25 फीसदी मुस्लिम हैं। बड़ी आबादी मजदूरों की है, कारीगर और मिस्त्री भी हैं। कोरी समाज के लोग मुगलकाल में बुनाई का काम करते थे। अब ये अलग-अलग चीज के मिस्त्री हैं। यहां जूते के 12 कारखाने हैं। इनमें भी बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं। यहां सामुदायिक भवन भी बना हुआ है।