फिल्मी पर्दे पर मुगल ए आजम फिल्म का गीत प्यार किया तो डरना क्या के दृश्य तो देखे होंगे, जिसमें कांच के टुकड़ों से बनाए गए सेट में नाचते हुए अनारकली के हजारों अक्स नजर आते हैं। जिसने भी फिल्म में यह सीन देखा, वह मुरीद हो गया, लेकिन मुगलों की राजधानी रहे आगरा के किले में वाकई में ऐसा शीश महल मौजूद है,जहां माचिस की एक तीली की रोशनी से पूरा शीशमहल जगमगा उठता है और हजारों अक्श ठीक वैसे ही नजर आने लगते हैं, जैसे फिल्म में नजर आए।
आगरा किले का सबसे खूबसूरत हिस्सा शीशमहल का अनूठा कांच उस जमाने में सीरिया के अलप्पो प्रांत के हलब से मंगवाया गया था, जिसे शीशा ए हलबी का नाम दिया गया। ब्रिटिश राज के दौरान शीशमहल से शीशा ए हलबी निकल गया, जिससे यह इमारत खराब दिखने लगी थी, पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसका संरक्षण कर पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। केवल कांच की खिड़की से शीशमहल की झलक देखी जा सकती है।
मुगल बादशाह शाहजहां ने 1631-40 के बीच आगरा किला के अंगूरी बाग से सटे हिस्से में बांई ओर मुसम्मन बुर्ज के ठीक सामने तामीर किए गए शीश महल के लिए सीरिया के हलब से कांच मंगवाया था, जिसे शीशा-ए-हलबी नाम दिया गया। किले का शीश महल ही इसका सबसे खास स्मारक है, जो विदेशी सैलानियों को विस्मित करता रहा है। मुगल बादशाह शाहजहां ने दिल्ली और लाहौर के किलों में भी शीश महल बनवाए, लेकिन वे आगरा से बेहतर नहीं हैं। 127 मीटर के दो कमरों वाले शीश महल में गर्म और ठंडे पानी के टैंक और फव्वारा इसे हर मौसम के लिए खास बनाते हैं।
आगरा की गर्मी से बचने के लिए बनाया था शीश महल
गरा किले के दीवान-ए-ख़ास से सटे शीश महल को मुगल बादशाह शाहजहां ने 1631-40 के बीच बनवाया था। आगरा की सख्त गर्मी से बादशाह और उनके परिवार को बचाने के लिए इसका निर्माण हुआ था । यहां ठंडी आंतरिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए इसमें अतिरिक्त मोटी दीवारें थीं। प्लास्टर में स्थापित इसकी दीवारों और छत में कांच के कारण इसका नाम शीश महल रखा गया। शाहजहां के इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी के अनुसार, ये शानदार दर्पण हलब (अलेप्पो, सीरिया) के थे जो उस समय इस तरह के चश्मे के निर्माण का मुख्य केंद्र था। इतिहासकार अब्दुल हमीद के शब्दों में शीश महल निस्संदेह भारत में अपनी तरह का कांच के काम मे सबसे बेहतरीन है। ब्रिटिश दौर मे आगरा किले की लूट पाट मे अधिकांश कांच का काम गायब हो गया लेकिन 1978-81 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के आगरा सर्कल द्वारा इसका अधिकांश हिस्सा दुबारा बहाल किया गया था। यहां एक फव्वारे के साथ संगमरमर का टैंक है और दूसरे कक्ष में भी पूर्वी दीवार में एक समान टैंक है, जिसके कारण शीश महल ठंडा रहता था।
वीआईपी आगमन पर खुलता है शीश महल
पर्यटकों के लिए पहले मुसम्मन बुर्ज और खासमहल की तरह दीवान ए खास और शीश महल खुले हुए थे पर शीश महल के कांच जब खुरचे जाने लगे तो एएसआई ने पर्यटकों का प्रवेश बंद करा दिया। वीआईपी मेहमान के आगमन पर इसे जरूर खोला जाता है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी वीआईपी मेहमानों को किले के शीश महल का दीदार ठीक उसी तरह कराते हैं, जैसे ताजमहल में मुख्य गुंबद पर। इसी शीश महल के ठीक सामने बने मुसम्मन बुर्ज में शहंशाह शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब ने 8 साल तक कैद रखा था।
जैसे ताज पर टिकट, वैसे लगाएं, पर खोलें
एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन आगरा के अध्यक्ष शमशुद्दीन का कहना है कि दो सुरक्षा गार्ड लगाकर शीश महल गंभीर पर्यटकों के लिए खोल देना चाहिए। भले ही इसके लिए ताज की तरह अलग से टिकट लगा दिया जाए। युवा सैलानियों को तो अब पता ही नहीं कि किले में शीश महल भी है। टूरिज्म गिल्ड के उपाध्यक्ष राजीव सक्सेना का भी यही मानना है कि सीरिया के अलप्पो प्रांत के हलब से शीशा आने की बात जब उन्होंने एक विदेशी मेहमान को बताई थी तो वह तब चौंक गए थे। उन्होंने हाल के दिनों में सीरिया का नाम आतंकी घटनाओं के कारण सुना था। उन्हें शीशा ए हलबी के रूप में सीरिया की कला की जानकारी नहीं थी।