नियमित वेतन की मांग के लिए लखनऊ में चल रहे आंदोलन में बुधवार को समितियों के कर्मचारी शामिल होने पहुंचे। इस कारण पूरे दिन ताले लटके रहे। खेतों में चलने वाले ट्रैक्टरों की चाल थम गई। किसानों की बिना उर्वरक के बुवाई नहीं हो सकी। आज भी खाद मिलने के आसार कम हैं।
जिले की 96 समितियों पर सचिव सहित कुल 92 कर्मचारी कार्यरत हैं। इस समय आलू, सरसों और गेहूं आदि रबी फसलों की बुवाई चल रही हैं। किसानों को उर्वरक की सख्त जरूरत है। जिले के करीब 70 कर्मचारी लखनऊ धरना में शामिल होने के लिए सुबह ही रवाना हो गए। इस वजह से जिलेभर में सभी पर ताले लटके रहे। किसान खाद के लिए समितियों के चक्कर लगाते रहे। करीब 80 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। पहले से ही महंगे बीज और खाद की किल्लत के कारण फसल बुवाई में देरी हुई है। अभी 40 फीसदी भी बुवाई नहीं हो सकी है। जबकि जिले के 80 फीसदी किसान अक्तूबर माह में ही पूरी कर लेते हैं।
सैंया के किसान छीतर प्रसाद ने बताया कि आलू का बीज चार दिन से उपचारित करके रखा है। बिना खाद के बुवाई नहीं हो पा रही है। फतेहाबाद के नगर चंद निवासी किसान दुर्ग सिंह ने बताया कि चार दिन पहले समिति पर कागज जमा किए हैं। आज आए तो ताला लटका मिला। बिना खाद के कैसे बुवाई हो।
हड़ताल ने बढ़ाई किसानों चिंता
हड़ताल के कारण इरादतनगर, किरावली, सैंया, लादूखेड़ा, बाह, अकोला सहित पूरे जिले में किसान चिंतित हैं। इरादतनगर सहकारी समिति पर पहुंचे किसान बनवारी लाल त्यागी और अकोला की समिति पर पहुंचे शैलेंद्र सिंह ने बताया कि ऐसे समय पर हड़ताल से फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।
बाजार से महंगी खरीदनी पड़ेगी खाद
लादूखेड़ा समिति से जुड़े किसान शंकर सिंह व विजय सिंह ने बताया समिति पर पिछले चार दिनों से खाद नहीं है। समिति पर ताला लटका है। निजी दुकानदारों से 1350 रुपये की डीएपी 1700 से 1800 रुपये प्रति कट्टा खरीदनी पड़ रही है।
उत्तर प्रदेश सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह भदौरिया ने कहा कि विभिन्न संगठनों से जुड़े आगरा के करीब 70 समिति कर्मचारी लखनऊ आए हैं। सहकारिता मंत्री ने 20 दिन का समय मांगा है। हड़ताल खत्म करने की अपील की है। आज सुबह शीर्ष नेतृत्व की बैठक होगी उसमें हड़ताल पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।- ,
उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष मुकेश चौधरी ने बताया कि सरकार कर्मचारियों के नियमित वेतन और बकाया भुगतान की व्यवस्था नहीं करती तब तक समितियों में तालाबंदी और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा।