यूरोप की मंदी और पश्चिम एशिया में चल रही हिंसा का असर आगरे के जूतों पर पड़ा है। 7 सालों में पहली बार आगरा के जूता निर्यात में 9 फीसदी से ज्यादा की कमी आई है। हर साल आगरा से निर्यात 10 से 12 फीसदी तक बढ़ रहा था, लेकिन इस बार यह गिरावट होने से करीब 20 फीसदी का नुकसान निर्यातकों को झेलना पड़ रहा है। यह दौर लंबा चला तो कारीगरों के रोजगार पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
काउंसिल आफ लेदर एक्सपोर्ट (सीएलई) ने जनवरी 2015 और अप्रैल 2015 से जनवरी 2016 तक के एक साल के तुलनात्मक आंकड़े जारी किए हैं। सीएलई के यह आंकड़े पहली बार नकारात्मक आए हैं। अभी तक चीन से मुकाबला करता हुआ आगरा का जूता निर्यात लगातार बढ़ रहा था। आगरा के जूते की यूरोप और अमेरिका में जबरदस्त डिमांड बनी हुई थी, लेकिन यूरोप में लगातार मंदी के दौर और पश्चिम एशिया में जारी हिंसा के चलते निर्यात में यह कमी हुई है। सबसे ज्यादा लेदर फुटवियर उद्योग प्रभावित हुआ है, वहीं इसके बाद कंपोनेंट और लेदर गुड्स में कमी देखी गई है।
उत्पाद जनवरी 2016 जनवरी 2015
फुटवियर 239.17 230.51 करोड़
कंपोनेंट 2.67 3.19 करोड़
नॉन लेदर 0.29 0.87 करोड़
लेदर गुड्स 1.21 1.41 करोड़
उत्पाद अप्रैल-जनवरी 16 अप्रैल-जनवरी 15 कमी
फुटवियर 2148 2362 करोड़ -9.04%
कंपोनेंट 29.1 32.6 करोड़ -10.95%
नॉन लेदर 7.85 7.79 करोड़ 0.83%
लेदर गुड्स 14.6 15.9 करोड़ -8.17%
कुल 2200 2419 करोड़ - 9.04%
‘यूरोप की मंदी और पश्चिम एशिया में खराब हालातों के कारण जूते के निर्यात में 7 सालों में पहली बार इतनी गिरावट आई है। हर साल बढ़ोतरी के उलट 9 फीसदी की गिरावट से रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा’
पूरन डावर
अध्यक्ष, एफमेक