डॉ. ओमकांत गुप्ता के मुताबिक इस ऑपरेशन में क्षतिग्रस्त मांस, विभिन्न प्रकार की नसों, त्वचा व हड्डी की बहुत बारीकी से सफाई व हटाया जाता है, इसके बाद क्रमश: हड्डी, मांस व खून की नसों और अन्य नसों व त्वचा को जोड़ा जाता है। ऑपरेशन करना तभी संभव है जब मरीज व कटा हुआ हाथ या अन्य हिस्सा 6 घंटे में उचित विशेषज्ञ के पास पहुंच जाए।
कटे हुए हिस्से को कम तापमान करीब चार डिग्री सेल्सियस पर रखा जाए तो 10-12 घंटे तक भी ऑपरेशन कर सकते हैं। जितना जल्द ऑपरेशन हो सके उतना अच्छा है। रोहित यादव को लेकर उनके पिता दुर्घटना के दो घंटे में ही हॉस्पिटल पहुंच गए थे।
इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
- दुर्घटना के बाद कटे हुए अंगों को प्लास्टिक की थैली में सील करना चाहिए। आइस बॉक्स में या पानी भरी थैली जिसका तापमान 4 डिग्री सेल्सियस हो जाता है में भी रख सकते हैं। एकदम बर्फ में रखने से मांस जम सकने की वजह वह खराब हो जाता है।
- मरीज का खून बहने से रोकने के लिए जो भी साफ कपड़े उपलब्ध हों उसे सीधे घाव पर रखकर 10 मिनट तक दबाएं रखें फिर पट्टी बांधना चाहिए।
- मरीज में हाथ व बांह जीवित बचने के बाद भी हाथ को काम करने में महीनों व एक-दो साल लग जाते हैं। कुछ और ऑपरेशन की जरूरत पड़ सकती है।