शास्त्रीपुरम हाइट्स योजना के फ्लैट
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उत्तर प्रदेश के आगरा में आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की फेल योजना शास्त्रीपुरम हाइट्स पर 'ज्यों-ज्यों किया इलाज, मर्ज बढ़ता गया' ये कहावत चरितार्थ हो रही है। इसमें 556 फ्लैट हैं। इन्हें बेचने के लिए एडीए तीन साल से पापड़ बेल रहा है। पहले कीमत घटाई, फिर मुनादी कराई। दिल्ली, जयपुर से इंदौर तक पर्चे बंटवाए। प्रचार पर लाखों रुपये फूंक दिए, लेकिन संपत्तियां नहीं बिक पाईं।
शास्त्रीपुरम हाईट्स योजना का 2012 में निर्माण शुरू हुआ। 2018 में निर्माण पूर्ण हुआ तो बिक्री शुरू करने में तीन साल निकल गए। 2021 में बिक्री शुरू की गई तो तीन साल में 556 में सिर्फ 42 फ्लैट बिके। इस प्रोजेक्ट पर एडीए ने करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए थे। 556 फ्लैट की कीमत करीब 170 करोड़ रुपये है। इनमें 514 नहीं बिके।
करीब 150 करोड़ रुपये फंसे पड़े हैं। जानकारों का कहना है कि शास्त्रीपुरम हाइट्स का हश्र भी कहीं एडीए हाइट्स जैसा न हो जाए। ताजनगरी फेस-2 में एडीए हाइट्स योजना में 14 साल बाद भी 300 से अधिक फ्लैट खाली पड़े हैं। बिना बिके फ्लैट जर्जर हो गए। मरम्मत पर 20 करोड़ से अधिक एडीए खर्च कर चुका है।
बिक्री के लिए हुए ये उपाय
- 17 नवंबर 2021 से 1 जून 2022 तक छह बार फ्लैट बिक्री के लिए पंजीकरण खोले गए।
- 19 दिसंबर 22 से 16 जनवरी 2023 तक बिक्री के लिए विज्ञापन, होर्डिंग व शिविर लगाए।
- दिल्ली, जयपुर, लखनऊ व इंदौर व आगरा शहर में 40 हजार से अधिक पर्चे बांटे गए।
- साइट पर दो दिवसीय क्रिसमस मेला, ऋण सुविधा शिविर व हेल्पलाइन नंबर जारी किए।
- कॉल सेंटर के माध्यम से 1500 लोगों से संपर्क किया, रेडियो व अन्य माध्यमों से प्रचार।
- 20 से 29 दिसंबर 2022 तक फ्लैट बिक्री के लिए विभिन्न क्षेत्रों में एडीए ने मुनादी कराई।
- वर्ष 2021 में 4223 रुपये प्रति वर्ग फीट थीं, जिन्हें 2022-23 में घटाकर 2617 रुपये किया।
संपत्तियां नहीं बिकने के प्रमुख कारण
- आगरा विकास प्राधिकरण के निर्माण की गुणवत्ता खराब है।
- निजी बिल्डरों की तुलना में एडीए की संपत्तियां महंगी हैं।
- आवासीय योजनाओं से मुनाफा कमाने की कोशिश होती है।
- संपत्ति खरीद के बाद एडीए में आवंटियों की सुनवाई नहीं है।
- एडीए अधिकारियों व कर्मियों का खरीदारों के प्रति व्यवहार।
(नोट: जैसा कि पूर्व आवंटियों ने बताया)
एजेंसी से कराएंगे बिक्री
शास्त्रीपुरम हाइट्स की जो संपत्तियां नहीं बिक सकी हैं, उनके लिए एजेंसी हायर की जाएगी। यह निर्णय हो चुका है। - रितु माहेश्वरी, मंडलायुक्त एवं अध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण