पुलिस के सामने चुनौती उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाने की थी। यह जिम्मा फोरेंसिक एक्सपर्ट को सौंपा गया था। मौका ए वारदात पर फोरेंसिक वैज्ञानिक गीता रानी और कपिल कुमार आए थे। इस मामले में 18 जनवरी से चार फरवरी तक बहस हो चुकी है।
बचाव पक्ष ने ऐन वक्त पर दी अर्जी
प्रवीण कुमार गुलाटी ने बताया कि तीन मार्च 2020 तक सभी 16 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके थे लेकिन कोरोना के कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही था। अदालती प्रक्रिया सामान्य होने के बाद सुनवाई में तेजी आई है।
मामला अपर जिला जज ( तृतीय ) शिवानंद की कोर्ट में है। इसमें फैसले के लिए 12 फरवरी की तारीख लग गई थी लेकिन बचाव पक्ष ने ऐन वक्त पर डॉक्टर के बयान दर्ज कराने की अर्जी दे दी। यह खारिज हो चुकी है। अब 20 फरवरी को अंतिम बहस होगी।
खोजी कुत्ता ने दिया था सबसे बड़ा सुबूत
मां-बेटी ने संघर्ष किया था, इससे हत्यारोपी का भी खून निकला था। यह घर में पड़ी टाइल्स पर गिरा था। उसने टाइल्स घर के पीछे की तरफ फेंक दी थी। पुलिस का खोजी कुत्ता उन टाइल्स तक पहुंचा। इनसे खून के नमूने फोरेंसिक टीम ने लिए। इस नमूने को गौरव के डीएनए से मिलान कराया गया। यह मिल गया था। इसकी रिपोर्ट भी सुबूत के तौर पर रखी गई।
हत्याकांड के बाद पहाड़ों की सैर पर गया था गौरव
गौरव पर शक पुलिस को इसलिए हुआ क्योंकि रमा और दीक्षा की हत्या हो जाने के बाद वह न मौके पर नजर आया और न ही श्मशान घाट में। तेरहवी में भी वह नहीं दिखा तो शक और बढ़ गया। उसके मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई तो यह हिमाचल प्रदेश के कसौली की आई। वह दोस्तों के साथ पहाड़ों की सैर कर रहा था। पुलिस ने उसे वहीं से पकड़ा था।