आगरा के थाना नाई की मंडी क्षेत्र में वर्ष 2009 में हुए बवाल के मामले के दस आरोपी नौ मार्च को साक्ष्य के अभाव में बरी हो गए थे। इस पर अपर जिला जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष एवं मुकदमे के वादी आरके शर्मा और विवेचक स्वामी दयाल की विवेचना में लापरवाही मानी। कोर्ट ने दोनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र लिखा है। पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव गृह लखनऊ को भी आदेश की प्रति भेजने के आदेश अधीनस्थों को दिए हैं।
नाई की मंडी क्षेत्र में 14 अक्टूबर 2009 को तार में कटिया डालने पर विवाद के बाद दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे। पथराव और फायरिंग की गई थी। पुलिस को भी बवालियों ने निशाना बनाया था। मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष आरके शर्मा ने मुकदमा दर्ज कराया। विवेचक उप निरीक्षक स्वामी दयाल थे। कोर्ट ने अधिकारियों को प्रेषित पत्र में लिखा कि वादी मुकदमा और विवेचक ने कोर्ट के समक्ष अत्यंत उपेक्षात्मक उदासनीता पूर्ण और आपत्तिजनक ढंग से गवाही दी।
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विशेष रूप से विवेचक की विवेचना अत्यंत सतही थी। घटनास्थल से ईंट-पत्थर न ही खोखा बरामद किए। घायल हुए लोगों और पुलिसकर्मियों का मेडिकल भी नहीं कराया। अभियुक्तों के बयान नहीं लिए। औपचारिक शिनाख्त भी नहीं कराई। वादी और विवेचक ने अभियुक्तों की संलिप्तता से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं दिया।
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अपर जिला जज ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने अपने पत्र में कहा कि ऐसी निम्न स्तरीय विवेचना कर मृत प्राय आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित करने से अच्छा होता कि पुलिस उक्त प्रकरण में अंतिम आख्या ही प्रस्तुत कर देती, जिससे अदालत का 12 वर्ष का बहुमूल्य समय बचाया जा सकता था।