डॉ. भीमराव आंबेडकर से संबद्ध और शहर के सबसे पुराने महाविद्यालय के इतिहास में पहली बार किसी प्राचार्य के खिलाफ शिक्षकों ने मोर्चा खोला है। शिक्षक प्राचार्य पर नियमानुसार परीक्षा कार्य न कराने और अवकाश स्वीकृत करने में मनमानी का आरोप लगा रहे हैं।
आगरा कालेज के शिक्षकों और प्राचार्य के बीच तकरार और बढ़ गई। प्राचार्य की ओर से धरना दे रहे शिक्षकों को बिंदुवार दिए गए जवाब के बाद भी 11वें दिन सोमवार को शिक्षकों का धरना जारी रहा। धरने पर बैठे शिक्षकों ने प्राचार्य के जवाब को खारिज कर दिया है।
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आगरा कॉलेज में शिक्षक संगठन स्टाफ़ क्लब के नेतृत्व में महाविद्यालय के शिक्षकों ने अपनी मांगों के पक्ष में 11वें दिन भी धरना दिया। शिक्षकों ने कहा कि 3 जून की वार्ता में प्राचार्य एवं स्टाफ क्लब के पदाधिकारियों के बीच जिस बिंदु पर अंत में सहमति बनी थी, उसे प्राचार्य ने अपने पत्र में तार-तार कर दिया। प्राचार्य ने संगठन की जगह सभी शिक्षकों के नाम पर व्यक्तिगत पत्र भेजे हैं, जबकि धरना संगठन की ओर से दिया जा रहा है। प्राचार्य फिर से अपनी बात से मुकर गए हैं। शिक्षक विश्वविद्यालय के परीक्षा के कार्यों में सहयोग करते हुए धरने पर बैठे रहेंगे। वह अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। धरनास्थल पर ठाकुर वीर सिंह, कालेज टूंडला से औटा की सदस्य निर्मला सिंह और पूनम तिवारी ने समर्थन दिया।
धरने में डॉ. डीके मौर्या, डॉ. रणधीर सिंह इंदौलिया, डॉ. अनुराग पालीवाल, डॉ. अतर सिंह, डाॅ. जयप्रकाश, प्रो. भूपाल सिंह, भूपेंद्र चिकारा, डॉ. आनंद प्रताप, प्रो. शरद चंद भारद्वाज, डॉ. चंद्रशेखर शर्मा, प्रो. विजय सिंह, डॉ. केके सिंह आदि मौजूद रहे।