देश को मिल रही नई संसद की सौगात और सेंगोल को स्थापित करने पर विवाद हो रहा है। पर, आगरा नगर निगम में 63 साल से चांदी का सेंगोल देकर सत्ता का हस्तांतरण करने की परंपरा अनवरत जारी है। शनिवार को निवर्तमान मेयर नवीन जैन ने 8 किलो चांदी से बने राजदंड कहें या ‘सेंगोल’ को नवनिर्वाचित मेयर हेमलता दिवाकर को सौंपकर सत्ता का हस्तांतरण करने की परंपरा बनाए रखी। एक फरवरी 1960 में आगरा नगर महापालिका बनने के बाद पहले मेयर शंभूनाथ चतुर्वेदी ने सेंगोल की परंपरा शुरू की। जिसके लिए 8 किलो चांदी का ठोस सेंगोल बनवाया गया। इसी के साथ चांदी की एक तश्तरी भी बनवाई गई, जिस पर सेंगोल का गोल हिस्सा सदन में मेयर के सामने रखा जाता है। यह चांदी का सेंगोल आगरा नगर निगम के मेयर की ताकत को प्रदर्शित करता है।
नगर निगम सचिवालय के पूर्व कर्मचारी लायकराम शर्मा ने बताया कि महापौर की शक्तियों और अधिकार को प्रदर्शित करने के लिए तीन चीजें वर्ष 1960 में शुरू की गई थीं। इनमें चांदी का बना ठोस गदानुमा सेंगोल, इसे रखने के लिए चांदी की ही तश्तरी और चांदी की बनी कैंची थी। कैंची का इस्तेमाल मेयर की ओर से शहर में विभिन्न उद्घाटनों के दौरान किया जाता था। बाद में चांदी की कैंची रखने की परंपरा गायब हो गई। अब सिर्फ सेंगोल और चांदी की तश्तरी ही बाकी है, जिसे नगर निगम सदन के अधिवेशन से पहले मेयर के आगे-आगे लेकर उनका अर्दली चलता है।
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चांदी की तश्तरी पर रखा जाता है सेंगोल
सचिवालय के ही पूर्व कर्मचारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि अधिवेशन में सदन में मेयर के सामने डायस पर चांदी की तश्तरी पर ही सेंगोल रखा जाता है, अन्यथा इसे मेयर पकड़े रहेंगे। 1960 में बनी चांदी की सेंगोल पर हर बार पॉलिश करा दी जाती है। यह डिजाइनदार सेंगोल है। पूर्व में नए सेंगोल को बनाने का प्रयास किया गया, पर निरस्त कर दिया गया।