आगरा में सोमवार इस सीजन का सबसे प्रदूषित दिन रहा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सूची में आगरा का एक्यूआई 474 दर्ज किया गया, जो अब तक का सर्वाधिक है। रविवार को आगरा देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में नंबर एक पर था, लेकिन सोमवार को हरियाणा और एनसीआर के शहरों में हवा ताजनगरी से ज्यादा जहरीली रही। आगरा में बढ़ते प्रदूषण के लिए यहां के लोग प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
ताजमहल पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए सबसे पहले 17 मई 1999 को टीटीजेड (ताज ट्रेपेजियम जोन) अथॉरिटी का गठन किया गया। कमिश्नर की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय कमेटी बनी, जिसमें पुलिस, प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण, एडीए, पेट्रोलियम मंत्रालय, एएसआई, वन विभाग के अधिकारी थे। अब अथॉरिटी में 25 सदस्य हैं, लेकिन प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है।
टीटीजेड की तर्ज पर ही दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ईपीसीए का गठन किया गया, जिसने ऑड इवन समेत कई कदम उठाए, लेकिन टीटीजेड अथॉरिटी देश में सबसे जहरीली हवा होने के बाद भी कोई कदम नहीं उठा पाई। टीटीजेड के सभी जिलों के डीएम समेत सरकारी विभागों के अधिकारी होने पर भी प्रदूषण रोकने के लिए प्रयास नहीं हुए।
'तुरंत इमरजेंसी बैठक हो'
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा ने बताया कि टीटीजेड अथॉरिटी की तत्काल इमरजेंसी बैठक होनी चाहिए, जिसमें सभी निर्माण कार्यों पर तुरंत रोक लगाई जाए। जल निगम, स्मार्ट सिटी, नगर निगम को तुरंत खोदाई से रोका जाए। इन सभी सरकारी विभागों पर जुर्माना लगाया जाए। ,
'जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई'
टीटीजेड अथॉरिटी केशो मेहरा ने बताया कि आगरा में हेल्थ इमरजेंसी जैसे हालात है। अथॉरिटी सक्रियता से प्रदूषण नियंत्रण की मानीटरिंग करे। जल निगम जैसे विभागों पर कड़ी कार्रवाई की जाए जो लाखों लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। प्रदूषण के लिए सरकारी विभाग जिम्मेदार हैं, लेकिन ठीकरा उद्योग पर फोड़ देते हैं।
सेहत से खिलवाड़
सीवर और पानी की पाइप लाइन बिछाने के लिए की जा रही खोदाई में चार लाख लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे जलनिगम ने धूल नियंत्रण का एक भी कदम नहीं उठाया। पश्चिमपुरी में खोदाई हो रही है, लेकिन न तो छिड़काव कराया जा रहा है और न ही हरा पर्दा लगाया गया है। यहां से धूल कण एक किमी दूर तक उड़कर आवास विकास, बोदला, सिकंदरा रोड तक पहुंच रहे हैं।