एमएसएमई क्षेत्र के उद्यमियों ने दावा किया कि बेहतर नीतियों, आधुनिक तकनीक और क्लस्टर डेवलपमेंट के जरिए आगरा अगले पांच वर्षों में 50 हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हब बन सकता है। उद्यमियों ने टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन सेंटर, इंटरनेशनल एमएसएमई एक्सपो और ब्रश उद्योग को बढ़ावा देने जैसी मांगें भी रखीं।
भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में एमएसएमई सेक्टर सबसे अहम कड़ी है। लोकल टू ग्लोबल की सोच, तकनीकी उन्नयन और सरकारी नीतियों के दम पर आगरा का उद्योग अब अगले दशक की बड़ी छलांग लगाने को तैयार है। पांच साल में 50 हजार करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट हब बनेगा।
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अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के उपलक्ष्य में उद्यमियों ने भविष्य का खाका तैयार किया। निर्णय हुआ कि हाल ही शहर में हुई ब्रिक्स देशों की कॉन्फ्रेंस आगरा की वैश्विक पहचान का पुख्ता प्रमाण है। उद्यमियों का मानना है कि ओडीओपी, फुटवियर, हैंडीक्राफ्ट और आयरन कास्टिंग के दम पर शहर का एमएसएमई सेक्टर विश्व पटल पर छाएगा।
50 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट हब
लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव मनीष कुमार अग्रवाल का कहना है कि भविष्य डिजिटल और ग्रीन एमएसएमई का है। यदि रॉ-मटेरियल बैंक और सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा मिले, तो क्लस्टर डेवलपमेंट के जरिए आगरा अगले 5 साल में 50 हजार करोड़ का एक्सपोर्ट हब बन सकता है।
ब्रश टाउन ऑफ इंडिया की मांग
आगरा ब्रश एसोसिएशन के महासचिव नितिन अग्रवाल ने बताया कि आगरा को ब्रश टाउन ऑफ इंडिया का दर्जा देने और आधुनिक मशीनों पर 50% सब्सिडी की मांग की गई है। इससे ब्रश उद्योग अकेले हजार करोड़ रुपये का कारोबार कर सकता है।
टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन सेंटर की जरूरत
राष्ट्रीय सचिव लघु उद्योग भारती दीपक अग्रवाल का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट, गंगाजल और मेट्रो प्रोजेक्ट से आगरा का इकोसिस्टम पूरी तरह बदलेगा। चीन को पछाड़ने के लिए स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और आगरा में टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन सेंटर की सख्त आवश्यकता है।
इंटरनेशनल एमएसएमई एक्सपो
आईआईए के पूर्व राष्ट्रीय कार्य परिषद सदस्य सुनील सिंघल ने कहा कि हर एमएसएमई को जैम पोर्टल से जोड़ने पर जोर दिया जाए। आगरा में इंटरनेशनल एक्सपो कराया जाए, जिससे यहां की जीडीपी दोगुनी हो सके।