आगरा। हाल ही में भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने विश्वकप जीतकर देश का मान बढ़ाया। इस ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जूनियर टीम के चयनकर्ता हरविंदर सिंह सोढ़ी अपने गृह नगर आगरा पहुंचे। उन्होंने खास बातचीत में जीत के पीछे की रणनीति, बीसीसीआई के स्ट्रक्चर और भारत-पाक मुकाबले को लेकर खुलकर चर्चा की।
सोढ़ी ने कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का जमीनी स्तर पर काम ही इस सफलता की असली वजह है। बीसीसीआई ने अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर नियमित जूनियर टूर्नामेंट शुरू किए हैं। इससे देशभर से प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। जब खिलाड़ी कम उम्र में ही प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट खेलता है तो उसका आत्मविश्वास और तकनीक दोनों मजबूत होते हैं। मजबूत नींव ही भारतीय क्रिकेट टीम की सफलता का आधार है।
सोढ़ी ने बताया कि बंगलूरू स्थित बीसीसीआई का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (पूर्व में नेशनल क्रिकेट अकादमी) भारतीय क्रिकेट की रीढ़ बन चुका है। यह केंद्र वीवीएस लक्ष्मण की देखरेख में संचालित हो रहा है। इसमें खिलाड़ियों को तकनीकी और मानसिक दोनों तरह की ट्रेनिंग मिलती है। इससे हमें जूनियर स्तर पर ही खिलाड़ियों को निखारने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि चयनकर्ता के तौर पर यह उनका दूसरा अंडर-19 विश्वकप खिताब है, जो उनके लिए गर्व का विषय है।
2022 की जीत और राहुल द्रविड़ का मार्गदर्शन
सोढ़ी ने बताया कि 2022 विश्वकप में भी चयनकर्ता के रूप में उन्होंने खिताब जीता था। कोविड काल के बाद वह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था। उस समय राहुल द्रविड़ से खिलाड़ियों की प्रतिभा को लेकर काफी महत्वपूर्ण इनपुट मिला था। उनकी प्रतिभा पहचानने में बेहद सटीक है। उनके सुझावों से टीम चयन में बहुत मदद मिली।
पाकिस्तान से मुकाबला हमेशा खास
भारत-पाकिस्तान मुकाबले को लेकर सोढ़ी ने साफ कहा कि चाहे जूनियर हो या सीनियर स्तर, यह मैच हमेशा हाई वोल्टेज रहता है। हमारे खिलाड़ियों ने पाकिस्तानी टीम की कमजोरियों को समझा और पूरा फोकस अपने खेल पर रखा। जिम्बाब्वे में हुए विश्वकप में पाकिस्तान को हराना खास उपलब्धि रही। टी-20 विश्वकप में पाकिस्तान का खेलने के लिए तैयार होना दर्शकों के लिए अच्छी खबर है।
एक खिलाड़ी के लिए विश्वकप जीतना सबसे बड़ा क्षण
सोढ़ी ने कहा कि अंडर-19 स्तर पर खिलाड़ी को सिर्फ एक बार विश्वकप खेलने का मौका मिलता है। ऐसे में खिताब जीतना उसके कॅरिअर का सबसे बड़ा क्षण होता है। विश्वकप जीतने के बाद खिलाड़ी के अंदर आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है। यही खिलाड़ी आगे चलकर सीनियर टीम की रीढ़ बनते हैं।