आगरा। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शहर में छोटे-बड़े तकरीबन 321 नाले हैं, जिनकी लंबाई करीब 188 किलोमीटर है। अधिकांश बड़े नालों के किनारे घनी बस्तियां हैं। लेकिन नालों की सफाई और उनकी मरम्मत के प्रति नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है। मंटोला, महावीर, काजीपाड़ा, नाला बुढ़ान सय्यद, नाला चूनपचान, लोहामंडी, खटीक पाड़ा, शाही कैनाल, राजश्री नाला आदि ऐसे नाले हैं, जिनकी गहराई 20 फुट तक है। वर्ष भर चमड़े की कतरन और पेठा का कचरा डलता है। अधिकांश स्थानों पर पुलिया टूटी पड़ी है तो कहीं नाले की दीवार। बरसात के समय जब नाले ओवर फ्लो होते हैं तो लोगों को नाले का पता नहीं लगता है।
पहले भी हुए हादसे
17 फरवरी 2012 : नाई की मंडी स्थित नाला चूनपचान में आठ वर्षीय बालक की मौत।
16 अप्रैल 2012 : बुढ़ान सय्यद निवासी जूता कारीगर बाबूलाल के चार वर्षीय बेटे की मौत।
अक्टूबर 2012: आगरा किला के पास मैनहोल में पंजाब की महिला चिकित्सक की गिरकर मौत।
13 जुलाई 2013 : कोटली बगीची, देवरी रोड निवासी चार वर्षीय अंशु की नाले में गिरने से मौत।
30 दिसंबर 2013 : बिचपुरी रोड पर सड़क पर खोदे गए गड्ढे में गिरकर बाइकसवार की मौत।
31 दिसंबर 2013 : जगदीशपुरा के केशव की बोदला स्थित नाले में गिरकर मौत।
1 जनवरी 2014 : अर्जुन नगर मेें नरेंद्र (40) को ट्रक ने टक्कर मार दी। नाले में गिरने से मौत।
20 जनवरी 2014 : नगला भवानी, देवरी रोड के ज्ञान देव की देवरी रोड पर नाले में गिरने से मौत।
28 फरवरी 2014 : सदर के नंदपुरा स्थित नाले में गिरकर दो साल के मासूम की मौत हो गई।
18 जुलाई 2014: नाला काजीपाड़ा क्षेत्र में ही नाले में गिरकर मासूम सूरज की मौत।
जल निगम को कोस रहे लोग
नाला काजीपाड़ा क्षेत्र के लोग जल निगम के अधिकारियों को कोस रहे हैं। 2011 में भीम नगरी आयोजन कमेटी से जुड़े हीरेंद्र सिंह ‘हीरो’ का कहना है कि 2011 में भीम नगरी के दौरान इस नाले को चौड़ा और कवर करने के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत हुए। तय हुआ कि नाले का निर्माण बिजलीघर की ओर से होगा। लेकिन विभाग ने अपनी सहूलियत के हिसाब से काजीपाड़ा की ओर नाला निर्माण शुरू किया। चार वर्ष से काम अधूरा पड़ा है। सीवर का काम भी अधूरा है। रमेश सोनकर ने बताया कि तत्कालीन एससी/एसटी आयोग की सदस्य सत्या बहन ने भी नाला निर्माण को स्वीकृत हुए एक करोड़ के बजट खर्च पर सवाल उठाए हैं।
मेयर नहीं पहुंचे मौके पर
आगरा। सोमवार को हुई घटना के बाद मेयर इंद्रजीत आर्य को मंगलवार को भी मौके पर पहुंचने का समय नहीं मिला। उनका जनकपुरी का दौरा भी प्रस्तावित था। शाम को मेयर ने अमर उजाला को बताया कि यह बड़ी दुखद घटना है। अधिकारियों को मामले की जांच और नालों की बाउंड्री बनवाने के निर्देश दिए हैं। तबियत खराब होने के चलते वे कहीं नहीं जा सके।
2008 में नगर आयुक्त हुए थे सस्पेंड
आगरा। निगम के सूत्रों ने बताया कि 2008 में महावीर नाला पर हींग की मंडी के पास एक देशी शराब के ठेके की दीवार बरसात के दौरान नाले में ढह गई थी। कई लोग भी नाले में गिरे थे। एक व्यक्ति की मौत हो गई। शासन ने तत्कालीन नगर आयुक्त श्याम सिंह यादव को निलंबित कर दिया था। हालांकि वे शासन के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे।
अमर उजाला ने पहले ही चेताया था
आगरा। मानसून से पहले नगर निगम के नाला सफाई अभियान की अमर उजाला ने प्रतिदिन पड़ताल की थी। टीम ने अभियान की खामियों को परत दर परत खोला था। नालों की स्थिति पर आगाह किया था कि कभी भी हादसे हो सकते हैं।
मंडलायुक्त ने तलब किए अधिकारी
आगरा। मंडलायुक्त प्रदीप भटनागर ने नगर निगम और जल निगम के अधिकारियों की क्लास ली। जल निगम के मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं कि नाला काजी पाड़ा का काम पूरा किया जाए। नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि शहर के अन्य नालों की जिनकी दीवार टूटी हैं उनके निर्माण के लिए निगम कार्य योजना तैयार करेगा।