खाद के सैंपल फेल, पांच दुकानों के लाइसेंस निरस्त
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कासगंज। रबी फसल की बुवाई शुरू होने वाली है। किसान तैयारी में जुटे हैं, लेकिन उन्हें अभी से खाद की चिंता सता रही है। खाद के लिए यहां के किसानों को दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है। कृषि विभाग चाहकर भी खाद की एक रैक नहीं मंगा सकता, क्योंकि यह आपूर्ति मांग से काफी अधिक हो जाती है।
कृषि विभाग के मुताबिक जिले को रबी फसल के दौरान 1800 मीट्रिक टन खाद की जरूरत होती है, लेकिन इसके लिए जिले को दूसरे जिलों पर निर्भर रहना होता है। एटा और कासगंज जिले के लिए संयुक्त रूप से खाद की रैक एटा स्टेशन पर लगती है। यह व्यवस्था वर्षों से है। वर्ष 2014 में कृषि विभाग ने कासगंज के लिए अलग से रैक मांगी, तो मालगाड़ी में मांग से अधिक आपूर्ति मिल रही थी। उस समय फर्रुखाबाद जिले ने भी शासन से रैक मांगी थी। तब व्यवस्था बनाई गई कि आधी रैक कासगंज जिले को व आधी रैक फर्रुखाद जिले को दे दी जाएगी, लेकिन कासगंज में कभी भी खाद की रैक नहीं लग सकी है। क्योंकि फर्रुखाबाद और कासगंज को एक साथ खाद स्वीकृत नहीं हुआ है। जिले को फर्रुखाबाद जिले पर ही आश्रित रहना पड़ता है। जिस मालगाड़ी ट्रैक पर खाद की रैक 2014 में लगाई थी वह छोटा है। इसके लिए तत्कालीन डीएम ने इज्जतनगर रेलमंडल के डीआरएम को पत्र लिखा। रैक ट्रैक के विस्तारीकरण की योजना भी बनी, लेकिन यह कार्य अधर में ही लटक गया।
- खाद की रैक एटा स्टेशन पर लगती है। फर्रुखाबाद और कासगंज जिले को एक साथ खाद मिले तो कासगंज में रैक लग सकती है। समय रहते व्यवस्था बनाई गई है। खाद के लिए किसानों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा
-सुमित चौहान, जिला कृषि अधिकारी।