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भट्ठा संचालकों को रॉयल्टी पर देनी होगी जीएसटी

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कासगंज। ईंट-भट्ठा द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली मिट्टी पर खनन विभाग को दी जाने वाली रायल्टी पर अब भट्ठा संचालकों को 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी भी अदा करनी पड़ेगी। ऐसा न करने वाले ईंट भट्ठा संचालकों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
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जीएसटी के नोडल अधिकारी सहायक आयुक्त एमके शुक्ला ने बताया कि खनिजों की खुदाई के लिए दिए जाने वाले लाइसेंस को रायल्टी प्रमाण पत्र कहते हैं। इसके तहत कोई भी लाइसेंस धारक ईंट भट्ठा स्वामी मिट्टी खोद सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की सेवाओं को कर मुक्त नहीं किया जा सकता है। इसलिए ईंट भट्ठा स्वामी द्वारा रायल्टी की मद में सरकार को धनराशि अदा की जा रही है, जो जीएसटी के तहत कर योग्य है और इसकी जिम्मेदारी रायल्टी प्राप्त करने वाले भट्ठा संचालक की है।

नोडल अधिकारी ने कहा कि रायल्टी प्राप्त करके ईंट भट्ठा संचालक ने जीएसटी जमा नहीं किया तो वे जल्द ही जमा कर दें क्योंकि जिस दिन से रायल्टी प्रमाण पत्र प्राप्त किया है उसी दिन से उसकी कर देयता शुरू हो जाती है। उन्होंने कहा कि विलंब से जमा करने पर 18 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा। जिसके लिए विभाग की ओर से ईंट भट्ठा संचालकों को नोटिस जारी किए गए हैं।
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निरस्त होगा जीएसटी नंबर
कासगंज। राज्यकर विभाग की ओर से जीएसटी के नोडल अधिकारी ने बताया कि जिन व्यापारियों या कर दाताओं द्वारा रिटर्न 3बी दाखिल नहीं किए जा रहे हैं या फिर वह समय से जमा नहीं कर रह हैं तो उनकी ई-वे बिल डाउनलोड करने की सुविधा को समाप्त या प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही डिफाल्टर व्यापारी या कर दाता जिन्होंने लगातार रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें समरी एसेसमेंट के नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी रिटर्न दाखिल नहीं किए जाने पर जीएसटी नंबर के निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। नोडल अधिकारी ने व्यापारियों को रिटर्न दाखिल करने में आ रही समस्याओं के समाधान के लिए विभाग की कार्यालय में हेल्प डेस्क से मदद लेने को कहा है।
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