मैनपुरी। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में निजी स्कूलों के साथ नाइंसाफी की जा रही है। सहायता प्राप्त कालेजों के लिए मानकों को ताक पर रखा जा रहा है। जर्जर और अधूरे मानकों वाले सहायता प्राप्त कालेजों को भी केंद्र की सूची में शामिल किया गया है।
एक तरफ सरकार जहां समान शिक्षा तथा सर्व शिक्षा की बात कर रही है। वहीं दूसरी तरफ सहायता प्राप्त कालेजों के छात्र-छात्राओं के साथ सरकार व विभाग द्वारा दोहरा मापदंड अपनाया जा रहा है।
वर्ष 2018 की बोर्ड परीक्षा के लिए जो केंद्र निर्धारित किए गए हैं उनमें सहायता प्राप्त कालेजों के लिए मानकों को ताक पर रख दिया है। यहां न तो फर्नीचर की व्यवस्था देखी गई है और न ही विद्यालय भवन की।
यहां तक कि संबंधित कालेजों के प्रधानाचार्य भी छात्र आवंटन पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। दूसरी तरफ वे मान्यता प्राप्त कालेज जिनकी बेहतर छवि है। विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं। उनको केंद्र की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
एएलएमसी उमा विद्यालय नरायनपुर को वर्ष 2018 की बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया है। यह कालेज सहायता प्राप्त कालेज है। कालेज में मात्र छह कक्ष हैं। कालेज का भवन जर्जर है। यहां 850 परीक्षार्थियों का सेंटर रखा गया है।
भारती इंटर कालेज भैंसरोली को भी परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया है। विद्यालय में मात्र आठ कमरे हैं जिसमें छह टिनशेड हैं। जबकि मानक के अनुसार टिनशेड वाले कमरों में परीक्षार्थी नहीं बैठाए जा सकते। यहां 797 परीक्षार्थियों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
डीएवी इंटर कालेज आलीपुर खेड़ा, यहां मात्र 300 परीक्षार्थियों के लिए फर्नीचर की व्यवस्था है। प्रधानाचार्य इस बात को लिख के भी दे चुके हैं। इसके बाद भी परीक्षा केंद्र पर 1162 परीक्षार्थियों का सेंटर बनाया गया है।
डीआईओएस जीएस राजपूत ने बताया कि परीक्षा केंद्रों पर जिला समिति को निर्णय लेना है। सभी कालेजों से प्रत्यावेदन मांगे गए हैं। 20 नवंबर प्रत्यावेदन की अंतिम तिथि है। जहां अव्यवस्थाएं हैं वहां निरीक्षण कराया जा रहा है। परीक्षा केंद्र निर्धारण में बोर्ड की गाइड लाइन को पूरी तरह से ध्यान में रखा जा रहा है।