सोरों(कासगंज)।
सूकर क्षेत्र का सोमेश्वर मंदिर प्राचीन है। मंदिर में स्थापित शिव स्वरूप शिवलिंग पल-पल रंग बदलता है। मंदिर को लेकर पौराणिक किवदंति है कि चैत्र शुक्ल चतुर्दशी को उपवास करके सोमतीर्थ में स्नान करने के उपरांत भगवान सोमेश्वर शिव का दर्शन करके पूजा की जाती है। भगवान शिव के कैलाश धाम का सानिध्य प्राप्त होता है।
सोमेश्वर मंदिर भगवान शिव की अराधना का प्राचीन स्थल है। राजा सोमदत्त सोलंकी ने 900 ईसा में इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराई थी। भोलेनाथ की कृपा इस मंदिर में पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालु भक्तों को प्राप्त होती है। गंगा से गंगाजल लाकर भगवान शिव का श्रद्धालु जलाभिषेक करते हैं। सूकर क्षेत्र के इस मंदिर की ख्याति दूरस्थ क्षेत्रों तक है। यहां बड़ी संख्या लोग में पहुंचकर सोमेश्वर नाथ के दर्शन कर पुण्य अर्जित करते हैं। मंदिर के सेवायत लालो गोस्वामी बताते हैं कि इस मंदिर की पौराणिक मान्यता है। सोमेश्वर के दर पर पहुंचने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है। चैत्र मास की चतुर्दशी को सोमेश्वर भगवान की विशेष पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में वर्णित है।
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क्या कहते हैं तीर्थ नगरी के लोग
- सूकर क्षेत्र एक दिव्य तीर्थ है। भगवान वराह ने यहां अवतार लेकर इस स्थान को दिव्य बनाया, लेकिन सरकारों को न तो इस क्षेत्र की पौराणिक दिव्यता नजर आती है और न ही यहां का महत्व। सरकारों के द्वारा इस तीर्थ की घोर उपेक्षा की जा रही है जो गलत है। सुधीर तिवारी, तीर्थपुरोहित
- पौराणिक महत्व की सोरों तीर्थनगरी की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होती। जनप्रतिनिधियों के अब तक दिए गए कोरे आश्वासन खलते हैं। अब सरकार को सोरों को तीर्थस्थल घोषित कर देना चाहिए- शांत कुमार माहेश्वरी, कारोबारी
- अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के अधिवेशन में सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने का प्रस्ताव शासन को पूर्व में भेजा गया था। अभी तक सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। सरकार को सोरों को तीर्थस्थल घोषित करना चाहिए। सुशील चंद्र उपाध्याय, राष्ट्रीय संगठन मंत्री तीर्थपुरोहित महासभा
- सोरों सूकर क्षेत्र देव स्थली है। भगवान वराह के साथ-साथ यह स्थान शिव की कृपा के लिए भी जाना जाता है। इतना प्राचीन स्थल होने के बाद सरकार यहां के विकास को लेकर उदासीन है- लालो गोस्वामी, सेवायत सोमेश्वर मंदिर