कछला गंगाघाट पर गंगा स्नान करते समय बुधवार की सुबह फिरोजाबाद के तीन श्रद्धालु गंगा में डूब गए। उनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि दो सगे भाईयों की मौत हो गई। गंगा से एक का शव बरामद हुआ, दूसरे की सांसे चल रही थीं, बाद में उसकी भी मौत हो गई। एक साथ दो सगे भाईयों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
बुधवार को सुबह करीब 8 बजे फिरोजाबाद के द्वारिकापुरी निवासी चरन सिंह अपने पुत्र और पुरोहित के साथ कछला गंगाघाट पर देवताओं को गंगा स्नान कराने कार से पहुंचे थे। तभी गंगास्नान करते समय सबसे पहले पुरोहित संदीप(33) निवासी मोहल्ला रैना गंगा में डूबने लगा। उसको बचाने की कोशिश में अंकित ठाकुर और अजीत सिकरवार आगे बढ़ गए। पुरोहित को तो बचा लिया लेकिन अंकित और अजीत डूब गए। तभी गोताखोरों ने छलांग लगाकर अंकित और अजीत को गंगा से बाहर निकाला, लेकिन अंकित की मौत हो गई थी, जबकि अजीत की सांसे चल रही थीं। घाट पर लोगों ने अजीत के पेट में भरे पानी को निकाला उसे तत्काल चिकित्सा की जरूरत थी। पिता चरन सिंह चिकित्सा की गुहार लगाता रहा, लेकिन घाट पर कोई चिकित्सा की व्यवस्था नहीं थी। बाद में अपनी कार से अजीत को सोरों चिकित्सालय ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई। पिता की आंखों के सामने दो पुत्रों की मौत ने उन्हें झकझोर दिया। हादसे की जानकारी चरन सिंह ने अपने घर फिरोजाबाद दी। फिरोजाबाद से उनका पुत्र अतुल व अन्य परिजन मौके पर आ गए। रामेश्वर और गौरव भी डूब गए थे इन्हें बचा लिया गया।
अप्रैल से अब तक हुए हादसे
- 04 अप्रैल को गंगा में डूबकर अधेड़ की मौत
- 16 अप्रैल को वृद्ध की गंगा में डूबकर एक श्रद्धालु मौत हो गई।
- 23 अप्रैल को हजारा नहर में डूबकर युवक की मौत
- 26 अप्रेल को गंगा में नहाते समय तीन युवकों की डूबकर मौत
- 02 मई को एक युवक की अमांपुर काली नदी में तथा एक युवक की हजारा नहर में डूबकर मौत - 13 मई को गंगा में एमपी मुरैना के चार श्रद्धालु डूबे, एक की मौत, तीन बचाए
- 15 मई को राजस्थान के थाना चिकसोना के नगला सीकम के तीन लोगों की डूबकर मौत
- 19 मई को गंजडुंडवारा नहर में डूबकर बालक की मौत
- 23 मई को सोरों हरि की पैड़ी में सोरों के ही युवक की डूबकर हुई मौत
- 24 मई को गंजडुंडवारा नहर में एक युवक की स्नान करते डूबकर मौत।
घाटों पर सिर्फ पर्व के समय ही रहती है बेहतर व्यवस्था
कासगंज। लहरा, कछला और कादरगंज गंगा घाटों पर आए दिन गंगा में डूबने के हादसे होते रहते हैं। अब गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने लगी है ऐसी स्थिति में हादसों की संख्या और बढ़ सकती है। युवकों के डूबने के बाद गोताखोर देरी से पहुंचे। जब गोताखोर डूबे युवकों को बाहर निकालकर लाए तो जिस की युवक की सांस चल रही थी उस युवक को चिकित्सा न मिलने से बचाया नहीं जा सका। यदि गंगा घाट पर एंबुलेंस व चिकित्सकों की टीम होती तो श्रद्धालु की जान नहीं जाती। सामान्य दिनों में अक्सर बड़े हादसे होते हैं, लेकिन बदायूं के प्रशासन का इस पर ध्यान नहीं रहता। जबकि कछला गंगाघाट पर हर समय एंबुलेंस, चिकित्सा टीम, स्टीमर और गोताखोरों की जरूरत बनी रहती है। प्रशासन केवल स्नान पर्वों पर यह इंतजाम करता है। पहले कासगंज और बदायूं दोनों की गंगा पर सीमाएं लगती थीं, इसलिए अव्यवस्था रहती थी। लेकिन अब केवल बदायूं प्रशासन की सीमा लगती है फिर भी व्यवस्थाओं का टोटा हर समय रहता है।