खुले आसमान के नीचे टैंक्टर टाली पर लदा गेहूं।
बच्चों के पोषण के लिए आने वाले पुष्टाहार पर सभी भी की नजर लगी है। पटियाली की मुख्य सेविका ने अपने को सीडीपीओ बताकर पुष्टाहार से भरा ट्रक उतरवा लिया। सीडीपीओ ने इस पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है।
परियोजना से 2 जून को पुष्टाहार से भरा एक ट्रक पटियाली के लिए भेजा गया। इस ट्रक को मुख्य सेविका मंजू श्रीवास्तव ने अपने को बाल विकास परियोजना अधिकारी बताकर राजा रिजोला की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शशिबाला के साथ मिली भगत करके उतरवा लिया। इस ट्रक से 30-35 बोरी पुराने केंद्र पर उतर चुकी थी। जैसे ही मामले की भनक सीडीपीओ को हुई तो वे मौके पर पहुंच गई। उन्होंने ट्रक को उतरवाने से रोका तथा मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया। सीडीपीओ आशा गुप्ता ने बताया कि उनको 19 फरवरी को पटियाली की सीडीपीओ का चार्ज दिया गया था। मुख्य सेविका व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अप्रैल व मई माह से अनुपस्थित चल रही थी। मार्च माह से उन्होंने अपना कार्यालय नए स्थान पर बना लिया। जिसकी सूचना भी दे दी गई। 4 जून को आने वाल पुष्टाहार के ट्रक को नए कार्यालय पर उतरवाया गया है। मुख्य सेविका ने पुराने स्थान पर ही ट्रक से उतरावने का प्रयास किया था। उनकी सूचना पर ट्रक को पुलिस द्वारा कब्जे में लिए जाने की जानकारी मिलने के बाद डीपीओ ने 4 जून को शासनादेश के विरुद्ध सिढ़पुरा की सीडीपीओ को बैक डेट में चार्ज देकर ट्रक सुपुर्द करा दिया। उनको किसी प्रकार का पत्र भी जारी नहीं किया गया। डीपीओ संजीव कुमार का कहना है कि सीडीपीओ पटियाली आशा गुप्ता के खिलाफ काफी अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थी, जिसके चलते उनको पद से हटा दिया गया था। उन्होंने भेजे गए नोटिस भी लेने से इंकार कर दिया। वह मूल रुप से सुपरबाइजर हैं। उनके ऊपर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे निराधार हैं।