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गरीबों की थाली से गायब होने लगी हरी सब्जियां

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सब्जियों के दाम - फोटो : अमर उजाला
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एटा।
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जीएसटी के बाद महंगाई ने एक बार फिर से रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इसके चलते गरीब की थाली से हरी सब्जियां गायब हो गई हैं। एक पखवाड़े में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। हालांकि दालाें के दाम स्थिर रहने से थोड़ी राहत है। महंगाई से परेशान गृहणियों को किचन के बजट में कटौती करनी पड़ रही है।
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महंगाई से लोग परेशान हैं। दिनोंदिन सब्जियों के दाम बढ़ते जा रहे हैं। पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिकने वाला आलू दस रुपये हो गया है। सब्जी के थोक आढ़ती अशरफ हुसैन ने कहा कि एक तो बारिश के बाद सीजनल सब्जियां खेतों में खत्म हो चुकीं है। बाहर से सब्जियां आ रहीं हैं। दूसरा मीट पर सख्ती होने के कारण लोग हरी सब्जियां खरीद रहे हैं। इसके चलते बाजार में हरी सब्जियां की डिमांड बढ़ गई है। हरी सब्जियों पर महंगाई का डंक लगने के कारण गृहणियों को किचिन के बजट में बीस से तीस प्रतिशत की कटौती करनी पड़ रही है। गृहणी अमिता और प्रेमलता की माने तो हरी सब्जियों के मुकाबले दाल ज्यादा पक रहीं है।
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सब्जी का नाम 15 दिन पुरानी दरें नई दरें
टमाटर 20 रुपये 60-00
अरबी 10 रुपये 15-20
भिंडी 20 रुपये 25-30
आलू 05 रुपये 08-10
प्याज 08 रुपये 10-15
ग्वारफली 16 रुपये 25-30
लौकी 12 रुपये 18-20
बैगन 12 रुपये 18-20
काशीफल 10 रुपये 15-18
हरी मिर्च 20 रुपये 30-40
तोरई 15 रुपये 25-30
शिमला मिर्च 50 रुपये 60-70
नींबू 45 रु पये 72-80
नोट: सभी रेट एक किलो हैं।
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