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भ्रष्टाचारियों पर कसा शिकंजा, मगर न सुधरे हालात

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एटा। भ्रष्टाचार देश के लिए नासूर बन चुका है। छोटे-छोटेे कामों के लिए रिश्वत के जरिए भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भारत सरकार कवायदें कर रही है, लेकिन अब तक हालातों में सुधार नहीं है। जिले में साल 2018 में ही कई मामले ऐसे सामने आए जिनमें अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते धरा गया, लेकिन मामलों कार्रवाई का असर नजर नहीं आता। कार्रवाइयों के बाद भ्रष्टाचार शिकंजा कसने के दावे बहुत होते हैं, लेकिन इसे जड़ से खत्म करने की कोशिशें ठंडी पड़ी हैं। पढ़िए रिपोर्ट....
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केस नंबर एक
जिले में 18 जून 2018 को अवागढ़ में लेखपाल करतार सिंह चौहान को एंटी करप्शन टीम ने किसान से जमीन की नाप तौल के नाम पर 15 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। मामले में टीम लेखपाल को पकड़कर ले गई। कुछ दिनों तक वसूली का खेल बंद रहा, लेकिन अब फिर से शुरू हो चुका है।
केस नंबर दो
13 सितंबर 2018 को ही एंटी करप्शन टीम ने जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारी ओपी सिंह को एक फैक्ट्री संचालक से 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। मामले में एफआईआर के बाद एंटी करप्शन न्यायालय मेरठ में सुनवाई चल रही है। जबकि विभाग में सुविधा शुल्क का खेल बदस्तूर जारी है।
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केस नंबर तीन
24 सितंबर 2018 को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सब रजिस्ट्रार प्रमोद सक्सेना को 200 रुपये रिश्वत लेते पकड़ा था। सब रजिस्ट्रार के खिलाफ एफआईआर के बाद मामला मेरठ न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रमाण पत्रों के नाम पर वसूली
जिले में एक साल में हुई तीन कार्रवाइयों से साफ है कि भ्रष्टाचार जिले में पूरी तरह से काबिज है। आलम यह है कि जाति, आय समेत तमाम छोटे प्रमाण पत्रों के नाम पर 100-200 रुपये वसूले जाते हैं। मगर इन पर लगाम लगाने की व्यवस्थाएं फेल हैं। बेशक सरकार आनलाइन प्रक्रियाओं से भ्रष्टाचार को रोकने की कवायदें कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कवायदें ठंडी नजर आती हैं।
व्यवस्था से नहीं मन से खत्म हो भ्रष्टाचार
जेएलएन कालेज के समाज शास्त्र के प्रोफेसर डा. हरिओम शर्मा कहते हैं कि भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोगों को मन से काम करना होगा। हम जब किसी भी विभाग में काम कराने जाते हैं, तो सोचते हैं कि कुछ ले-देकर काम जल्दी हो जाए। बस इस सोच को बदलने की जरूरत है।
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कहते हैं लोग
भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लोगों को भी मन स्थिति बदलनी पड़ेगी। छोटे-छोटे कामों के लिए धन खर्च करने की प्रवृत्ति को छोड़ना होगा।
डा. सुनीता सक्सेना, प्रोफेसर
भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, तो सभ्य समाज और विकसित देश का निर्माण होगा। इसके लिए व्यवस्था के साथ मन बदलने की जरूरत है।
कुसुम वार्ष्णेय, प्रधानाचार्य
भ्रष्टाचार के खिलाफ कई आंदोलन किए हैं। लोगों को इसके खिलाफ जमकर आवाज उठाने की जरूरत है। तभी हम एक अच्छे समाज का निर्माण कर सकेंगे।
अखिल संघर्षी, किसान नेता
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए व्यवस्था पर अमल करने की जरूरत है। लोगों को यह अपनाना पड़ेगा कि काम प्रक्रिया के अनुरूप ही हो।
विशाल अग्रवाल, समाजसेवी
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