शिकोहाबाद। कांस्टेबल शिव कुमार मिश्रा का पांच दिन बाद प्रमोशन होना था। उनके प्रमोशन की जानकारी होने पर पूरे परिवार में खुशी की लहर थी। लेकिन उस खुशी को सभी मिलकर मनाते उससे पहले ही शिवकुमार सभी को छोड़ कर चला गया। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी सुनीता के कंधे पर दो जवान बेटे और एक बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई है। सिपाही की बेटी रिचा बीटीसी कर रही है। उसकी शादी के लिए वह वर तलाश रहे थे। उनकी मौत से उनके बेटे शिवम, रिशू और रिचा के सिर से पिता का साया उठ गया है। बड़ी बेटी शिखा से शिव कुमार ने शनिवार को सुबह ही फोन करके हालचाल पूछा था।
शिवकुमार मिश्रा की मौत की खबर सुनते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। वह जिले में वर्ष 2016 में आए थे। शिकोहाबाद में 29 अगस्त 2016 को चार्ज लिया था। कुछ दिन उन्होंने इंस्पेक्टर की गाड़ी चलाई, इसके बाद उन्हें थार पर भेज दिया था। वह शंकरपुरी में राजपाल सिंह भदौरिया के मकान में किराए पर रह रहे थे। यहीं पर उनके बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहेे हैं। शनिवार सुबह चालक शिव कुमार मिश्रा अपनी वर्दी पहन कर घर से रोज की तरह ड्यूटी पर गए।
दोपहर दो बजे के करीब थाना के दारोगा अभय कुमार सिसौदिया और होमगार्ड कौशल घटना की सूचना देने उनके आवास पर पहुंचे। उस समय घर पर उनकी बेटी रिचा और पत्नी सुनीता मौजूद थीं। जैसे ही उन्हें बताया कि शिवकुमार मिश्रा के गोली लग गई है। गंभीर हालत में ट्रामा सेंटर में भर्ती करा गया है। इतना सुनते ही पत्नी और पुत्री दहाड़े मार कर रोने लगीं। मां-बेटी का करुण क्रंदन सुन आसपास घरों की महिलाएं और पुरुष निकल आए। इसके बाद अस्पताल पहुंचने पर जैसे ही मौत की जानकारी हुई तो परिजनों में चीत्कार मच गई।
शनिवार थार को लेकर अपने साथियों संग शिव कुमार मिश्रा एटा रोड स्थित एफसीआई गोदाम के पीछे फायर ब्रिगेड परिसर खड़े थेे। उनके साथ एसआई इंद्रजीत सिंह, महिला कांस्टेबिल रेनू चौधरी, कांस्टेबिल रवींद्र कुमार साथ थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उपनिरीक्षक अपनी सर्विस रिवाल्वर को साफ करने लगे। इसी दौरान अचानक फायर की आवाज हुई और सामने बैठे चालक शिवकुमार के सिर से खून की फुहार छूटने लगीं।
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि शिव कुमार गोली लगते ही गिर पड़े। यह सब इतनी जल्दी हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। चालक के गोली लगने के बाद उपनिरीक्षक ने उन्हें अपनी गोद में समेट लिया। गोली की आवाज आते ही फायर ब्रिगेड कंट्रोल रूम में तैनात ब्रजवीर सिंह निकल कर बाहर आए तो खून से लथपथ सिपाही को देख हतप्रभ रह गए।
घटना के बाद उपनिरीक्षक थाने पहुंचे तो उन्हें अफसोस और पश्चाताप करने के अलावा कुछ नहीं था। उनके हाथों अंजाने में सिपाही शिव कुमार की मौत हो गई। एसआई विलाप करते हुए कह रहे थे कि उन्होंने पहले ही कहा था कि उन्हें फायर ब्रिगेड में ही तैनात रहने दिया जाए। थाने की नौकरी शुरू से ही पसंद नहीं आ रही थी। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों से भी कहा था, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। उपनिरीक्षक की बातें सुनकर वहां मौजूद अन्य पुलिस कर्मी भी दुखी नजर आये।
पिस्टल की सफाई करने के दौरान उप निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने सावधानी बरती होती तो सिपाही शिवकुमार मिश्रा की जान नहीं जाती। यह बात महकमे के जानकारों ने स्वीकारी। उनका कहना था कि पिस्टल साफ करने के दौरान कभी कॉक करनी हो तो नली का मुंह आसमान की ओर करें। इससे हादसे होने की संभावना नहीं रहती है।
शिकोहाबाद थाने की थार मोबाइल पर तैनात उप निरीक्षक इंद्रजीत सिंह ने पिस्टल सफाई करने के दौरान लापरवाही उजागर हुई है। जानकारों की मानें तो पिस्टल की सफाई के दौरान यदि पूरे कारतूस बाहर नहीं निकलें तो कभी भी उसे कॉक करने के दौरान नली का रुख सामने नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसका रुख आसमान की ओर ही रखें। पिस्टल की नली का रुख यदि नीचे की ओर रखने पर खुद के गोली लगने की गुंजाइश रहती है। उपनिरीक्षक की इन्हीं गलतियों की वजह से सिपाही की मौत हो गई।