मथुरा। वित्तीय वर्ष 2017-18 में अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। इन तीन दिन में सरकारी विभाग 100 करोड़ से ज्यादा धनराशि को ठिकाने लगाने जा रहे हैं। इसमें निर्माण एजेंसियां सबसे आगे हैं। इसके अलावा अन्य विभागों में भी भुगतान के हिसाब-किताब का दौर चल रहा है।
वर्तमान वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले ही सरकारी कार्यालयों में बजट को लेकर ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। सरकारी दफ्तर देर शाम तक खुल रहे हैं। वित्तीय मामलों से जुड़ी फाइलों का निस्तारण किया जा रहा है। शासन से लंबित बजट की मांग भेजी जा रही है। बजट भी आने लगा है। इसका उपयोग सिर्फ तीन दिन में होना है। यह प्रक्रिया विभागों ने शुरू भी कर दी है। पंचायती राज विभाग 23 करोड़ रुपये ग्राम पंचायतों के माध्यम से खर्च करने की तैयारी में है। यह राशि शौचालय और विकास पर खर्च की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग 15 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। राष्ट्रीय हेल्थ मिशन के तहत इस राशि का उपयोग कई माह से नहीं हो सका था। अब यह राशि खर्च की जानी है। प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत 1.5 करोड़ खर्च हो रहे हैं, जबकि 40 लाख रुपये तहसील को खर्च करने हैं। इनके अलावा जिला पंचायत, पीडब्लूडी, निर्माण निगम, आरईएस, नगर निगम, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण, शिक्षा, विद्युत सहित कई विभागों में वित्तीय वर्ष को लेकर गहमागहमी बनी हुई है। सभी विभागाध्यक्ष लंबित भुगतान करने में जुटे हुए हैं।
कहीं फर्नीचर खरीदा जा रहा तो कहीं कूलर
आफिस की साज सज्जा को आया बजट भी खर्च करने की प्लानिंग हो रही है। कहीं फर्नीचर खरीदा जा रहा है तो कहीं पर्दे। कूलर और पंखे भी लगवाए जा रहे हैं। गमले और वाटर कूलर की भी खरीद हो रही है। सभी की कोशिश है कि वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले सारा पैसा प्रयोग कर लिया जाए ताकि लैप्स होने से बचाया जा सके।