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कुते हुए खूंखार, रोज 42 जिंदगियां बन रहीं शिकार

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कुते हुए खूंखार, रोज 42 जिंदगियां बन रहीं शिकार - फोटो : अमर उजाला
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एटा। आवारा कुत्ते खूंखार होते जा रहे हैं। रोज 42 लोगों टूट रहा आवारा आतंक का कहर परेशानी बनता जा रहा है। जिले में श्वान अब तक छह हजार लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं, लेकिन सरकारी इमदाद लोगों के लिए सपना बनकर रह गई है। अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शनों का टोटा है और पीड़ित मायूस होकर लौट रहे हैं। सरकारों की अनदेखी के चलते निजी चिकित्सकों की पौ बारह हो रही है। वहीं चिकित्सक लोगों को आवारा श्वान से दूर रहने की सलाह दे रहे हैं।
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जिला अस्पताल में सामने आए आंकड़े आवारा कुत्तों के आतंक की कहानी बया कर रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो जिले में जनवरी से अब तक 6435 लोग कुत्तों के हमले का शिकार हो चुके हैं। जिले के राजा का रामपुर, अवागढ़ समेत तमाम स्वास्थ्य केंद्रों को तो सालों से एंटी रेबीज वैक्सीन मिली नहीं है। जबकि जिला अस्पताल में बीते छह महीनों से एंटी रैबीज इंजेक्शन की आपूर्ति सुचारु नहीं है। ऐसे में गरीब और पीड़ित मरीज निजी चिकित्सकों और बाजार की महंगी एआरवी पर निर्भर हैं। सरकारी इमदाद नहीं मिलने से लोगों में आक्रोश है, लेकिन सरकारी मशीनरी और स्वास्थ्य विभाग राहत देने में नाकाम हैं। उधर, पालिका ने भी अब तक जिले से आवारा आतंक को कम करने के लिए कोई प्रबंध नहीं किया है।

यह होता है रेबीज
रेबीज प्राणघातक वायरस है। जिला अस्पताल के डा. एनएस शाक्य बताते हैं कि स्वानों में दो प्रकार का रैबीज पाया जाता है। पहली गूंगी फोरम में स्वान एकांत में रहकर दम तोड़ देता है, लेकिन स्ट्रगल फोरम में वह खतरनाक हो जाता है। एक ही दिशा में दौड़ता है और जो भी जीव रास्ते में मिलता है उसे काट लेता है। मगर कुछ रैबीज ग्रसित स्वान में काटने की क्षमता क्षीण हो जाती है। रैबीज वायरस शरीर में व्याप्त सूक्ष्म छिद्रों से भी खून में प्रवेश कर सकता है। टीके न लगवाने की दशा में स्वान का काटना खतरनाक साबित हो सकता है। रेबीज से ग्रसित व्यक्ति में चार से आठ सप्ताह में लक्षण नजर आने लगते हैं।
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ये उपाय कम कर सकते हैं आवारा आतंक
- स्वानों को एंटी रैबीज के टीके लगवाए जाएं।
- मीट की दुकानों व ढाबों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण व्यवस्थित हो।
- पालतों स्वानों का पंजीकरण व उनके टीकाकरण की व्यवस्था हो।
- स्वान द्वारा काटने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह व उपचार लिया जाए।

रैबीज से ग्रसित स्वान के लक्षण
रेबीज से ग्रसित श्वान में कुछ खास लक्षण पाए जाते हैं। श्वान पानी से दूर भागता है। मुंह से लार टपकाता है। पूंछ लटकी रहती है। नीचे मुंह कर एक ही दिशा में भागता है।
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रैबीज के लक्षण
- काटे जाने वाले भाग पर खुजली।
- बुखार।
- भूख का कम लगना।
- सिर दर्द।
- बैचेनी।
- पानी से डर लगना।
- आंशिक पक्षाघात, भ्रम।
- अनिद्रा और भोजन निगलने में कठिनाई।
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